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इंदिरा गांधी गोरखपुर के इस महंत के निधन पर हो गई थीं दुखी, कहा था- 'ऐसे लोग धरती पर नहीं मिलते'

Thu, 19 Nov 2020 04:09 PM IST
vivek shukla टीपी शाही, गोरखपुर।
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पूर्व पीएम इंदिरा गांधी व महंत दिग्विजय नाथ। - फोटो : अमर उजाला।
आज पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 103वें जन्मदिन के अवसर पर हम आपको उनसे जुड़ी खास कहानी बताने जा रहे हैं। यह कहानी इंदिरा गांधी और ब्रम्हलीन गोरक्ष पीठाधीश्वर दिग्विजय नाथ की है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...
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महंत दिग्विजय नाथ।(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि ब्रह्मलीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत दिग्विजय नाथ 1967 में हिंदू महासभा के बैनर पर लोकसभा में पहुंचे थे। 1969 में उनका निधन हो गया था, उनके निधन पर देश भर के नेताओं ने शोक जताया था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी शोक संवेदना प्रकट करते हुए उन्हें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी करार दिया था।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री  इंदिरा गांधी ने कहा था कि महंत जी का शिक्षा और धर्म के क्षेत्र में बहुत ही ऊंचा स्थान है। वे असहयोग आंदोलन के साथ भी जुड़े थे। साइमन कमीशन का उन्होंने पुरजोर विरोध किया था। इसलिए वह हमेशा अंग्रेजों के निशाने पर रहते थे। इनके जैसा इंसान धरती पर रोज पैदा नहीं होते हैं।

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पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और महंत दिग्विजयनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
इंदिरा गांधी ने कहा था महंत दिग्विजय नाथ हैदराबाद सत्याग्रह से भी जुड़े थे। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय के स्थापना का महान कार्य किया। ऐसे महापुरुष के जाने से वह बहुत ही व्यथित हैं, मेरी शोक संवेदना उनके धर्म परिवार तक पहुंचाई जाए।
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भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
वहीं अटल बिहारी वाजपेई ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा था कि महंत दिग्विजय नाथ भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे थे। वह स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में से एक थे, जिन्होंने 1921 के असहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
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पूर्व लोकसभा अध्यक्ष गुरदयाल सिंह ढिल्लों(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष गुरदयाल सिंह ढिल्लों ने कहा था कि महंत दिग्विजय नाथ सदन में काफी लोकप्रिय थे, वे दृढ़ विचारों के व्यक्ति थे। उनका जाना देश की क्षति है।
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