दीनदयाल उपाध्याय गोखपुर विश्वविद्यालय ने एक बरस में कई उपलब्धियां हासिल की, लेकिन नैक मूल्यांकन न करा पाने और साल भर चले हंगामे का मलाल रह गया। दस रुपये थाली में भोजन और पांच रुपये में नाश्ता की योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। नई शिक्षा नीति के अनुरूप च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) को प्रदेश में सबसे पहले लागू करने का गौरव हासिल करने का अवसर मिली लेकिन, परीक्षाओं का परिणाम समय से नहीं आ सका। जो परिणाम आए उसमें भी भारी गल्तियां थीं, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को उठाना पड़ा।
शिक्षकों की भर्ती, महाविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति, नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का संचालन, नए छात्रावासों की सौगात से पठन-पाठन का माहौल बनाने की भरपूर कोशिश की गई। इन सबके बीच गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिंदी के विभाग के आचार्य प्रो. कमलेश गुप्त प्रकरण और प्री-पीएचडी छात्रों द्वारा कॉपी फाड़ने की घटना पूरे साल चर्चा का केंद्र बिंदु रही।