इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की गोरखपुर इकाई ने कोरोना के इलाज के लिए 15 निजी अस्पतालों को अनुमति देने पर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि हम इन्हें जानते तक नहीं। इन अस्पतालों के पास पर्याप्त सुविधा और संसाधन भी नहीं हैं। अब मरीजों के परिजनों से ज्यादा शुल्क वसूली की बात सामने आ रही है। तथ्यों के मुताबिक ‘अनजान’ अस्पतालों में ही मनमानी हुई है। इन्होंने निजी अस्पताल व डॉक्टरी के पेशे को बदनाम किया है। ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 47 निजी अस्पतालों को कोविड के इलाज की अनुमति दी। सरकारी अस्पतालों में बेड कम पड़े तो निजी अस्पतालों में मरीजों की लाइन लग गई। इसी का फायदा कुछ निजी अस्पताल संचालकों ने उठाया। शासन ने जो दाम तय किए थे, उससे ज्यादा शुल्क वसूले। कमिश्नर जयंत नार्लिकर की तरफ से गठित समिति के पास ज्यादा शुल्क वसूली के 27 मामले दर्ज कराए गए। दबाव पड़ने पर कई अस्पताल संचालकों ने पैसे वापस किए हैं। राणा हॉस्पिटल के संचालक ने एक लाख रुपये वापस किए हैं। बद्रिका हॉस्पिटल को सील करके मुकदमा दर्ज कराया गया। डिग्निटी हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त करके मरीजों को भर्ती करने पर रोक लगा दी गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
मनमाने ढंग से मंगवाए इंजेक्शन
कुछ निजी अस्पतालों ने बिना जरूरत मरीजों के परिजनों से रेमडेसिविर और टोसलीजुमैब इंजेक्शन मंगवाए। दोनों इंजेेक्शन बाजार में महंगे मिल रहे थे। एक शिकायत ऐसी भी आई कि निजी अस्पताल के चिकित्सक इंजेक्शन मंगा रहे हैं, लेकिन मरीज को लगाए नहीं जा रहे। अस्पताल का स्टाफ इंजेक्शन बेच देता था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
शव देते समय भी उगाही
कोरोना संक्रमित के निधन के बाद भी कुछ निजी अस्पतालों में मनमानी की गई। शव देने के बदले धन उगाही की शिकायतें मिली हैं। शिकायत के आधार पर जांच हुई तो मामला सही मिला। कई निजी अस्पताल हैं, जिन्होंने अधिक रकम वसूली है। इन रुपयों को प्रशासन ने परिजनों और उनके तीमारदारों को वापस कराए हैं।
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गोरखपुर राणा हॉस्पिटल।
- फोटो : अमर उजाला।
इन अस्पतालों पर कसा शिकंजा
बद्रिका हॉस्पिटल की तीन शिकायतें मिलीं। अस्पताल को सील करके मुकदमा दर्ज कराया गया। राणा हॉस्पिटल ने एक लाख रुपये वापस किए। डिग्निटी हॉस्पिटल के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज हैं। अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करके मरीजों की भर्ती पर रोक लगाई। एबीएस हॉस्पिटल, अर्पित हॉस्पिटल, मृत्युंजय हॉस्पिटल और जीवनदीप हॉस्पिटल ने भी ज्यादा शुल्क वसूले और वापस किए हैं।
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corona patient
- फोटो : istock
मरीजों को खरीदा और बेचा
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने कहा कि कोविड काल में कई निजी अस्पतालों ने मरीजों को खरीदा और बेचा है। एंबुलेंस चालकों से सेटिंग करके ऐसे अस्पतालों ने जमकर उगाही की है। अगर ऐसा नहीं होता तो ऐसे अस्पतालों को अनुमति नहीं दी जाती, जिन अस्पतालों में डॉक्टर विजिट ही नहीं करते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
बिना सेटिंग लूट संभव नहीं
आईएमए के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ अस्पताल संचालकों ने धन उगाही का खेल अकेले नहीं खेला है। सेटिंग के बल पर यह खेल खेला गया है। वरना ऐसे अस्पतालों को इलाज की अनुमति नहीं मिलती, जिन्हें आईएमए जानता तक नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
डॉक्टर नहीं रहते थे, विजिट फीस लेते थे
छात्र संघ चौराहा स्थित एक हॉस्पिटल मरीजों से उस डॉक्टर के नाम पर भी फीस ली जो डॉक्टर खुद कोरोना पॉजिटिव था और दिल्ली में इलाज करा रहा था। ऐसा केवल एक मरीज से नहीं बल्कि करीब 60 मरीजों से 10 दिनों तक सुबह-शाम के नाम पर दो-दो हजार रुपये वसूले गए। एक मरीज को जानकारी हुई तो उसने शिकायत की बात कही तो अस्पताल प्रशासन ने उसकी फीस को माफ करते हुए मामले को रफा-दफा कर दिया।
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डॉ. खालिद अब्बासी
- फोटो : अमर उजाला।
चिकित्सकों और उनके परिजनों से भी लूट
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने कहा कि कई अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने चिकित्सकों और उनके परिजनों तक को नहीं बख्शा। पेशे से जुड़े लोगों से भी ज्यादा शुल्क वसूले हैं। जब दबाव डाला गया, तब धनराशि वापस किए।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने बताया कि नर्सिंग होम एसोसिएशन कुछ अस्पतालों द्वारा ज्यादा पैसे वसूलने से आहत है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर बहुत से ऐसे अस्पतालों को अनुमति दी गई, जो अन प्रोफेशनल और गैर चिकित्सकों की ओर से चलाए जा रहे हैं। ऐसे अस्पतालों ने मरीजों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया गया है। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ एसोसिएशन कड़ी कार्रवाई की मांग करती है।
आईएमए सचिव डॉ वीएन अग्रवाल ने बताया कि जिले के 47 निजी अस्पतालों को कोरोना मरीजों के इलाज की अनुमति दी गई है। इनमें से 15 अस्पताल ऐसे हैं, जिन्हें आईएमए जानता तक नहीं। यह भी नहीं पता कि अस्पताल किसका है और कौन संचालित करता है। विजिट पर कौन-कौन डॉक्टर आते हैं। इन्हीं लोगों ने मरीजों का शोषण किया है। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ आईएमए कड़ी कार्रवाई की मांग करता है। हालांकि कुछ ऐसे अस्पतालों को प्रशासन ने नोटिस दिया है, जिन्होंने मरीजों के इलाज के लिए दूसरे डॉक्टरों की मदद ली है। ऐसे अस्पतालों को नोटिस के जवाब के लिए प्रशासन को समय देना चाहिए था।