गोरखपुर में दादा-दादी और दादा के बड़े भाई की हत्या का आरोपी झंगहा इलाके का रामदयाल शनिवार को जेल में भी उग्र हो गया। एक बंदी को रावण कहते हुए मारने के लिए उसके ऊपर कूद पड़ा। बंदीरक्षकों और डॉक्टरों ने किसी तरह पकड़कर उसे काबू में किया। इस दौरान वह बार-बार चिल्लाता रहा कि रावण का वध करने में जो भी बीच में आएगा, वह उसका दुश्मन है। जेल सूत्रों से यह जानकारी मिली है। उसे जेल अस्पताल में रखा गया है। मनोचिकित्सक ने उसकी जांच की है। उसे निगरानी में रखने की सलाह दी गई है।
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आरोपी रामदयाल
- फोटो : संवाद
रामदयाल को जेल अस्पताल के निगरानी वार्ड में रखा
जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने बताया कि शुक्रवार को आरोपी आया तो उसे रात में जेल के अस्पताल में रखा गया था। वह बार-बार इधर-उधर की कहानी सुना रहा था। इसलिए शनिवार को जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. नीरज शाही को बुलाया गया। उन्होंने उसकी जांच कर दवा दी है। डॉक्टर के कहे अनुसार, रामदयाल को जेल अस्पताल के निगरानी वार्ड में रखा गया है। निगरानी के लिए डॉक्टर और बंदीरक्षकों को लगाया गया है।
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घटनास्थल पर जुटी भीड़ और पुलिस
- फोटो : संवाद
उग्रता शांत करने के लिए दी गई दवा
डॉ. नीरज शाही ने बताया कि रामदयाल से मिला तो वह बहुत उग्र लग रहा था। उसकी उग्रता शांत करने के लिए पहले दवा दी गई। पूछताछ में उसने जो जवाब दिया, उससे यही लगा कि वह आभासी दुनिया में जी रहा है। विचारों में विकृतियां आने की वजह से वह खुद को देवता मान रहा है, अन्य लोग उसे रावण नजर आ रहे हैं। उसके अंदर बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण दिख रहे हैं।
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घटनास्थल पर जुटी भीड़ और पुलिस
- फोटो : संवाद
उन्होंने बताया कि फिलहाल उसकी पुरानी हिस्ट्री मांगी गई है। दवा भी दी गई है। एक सप्ताह बाद फिर शनिवार को उसकी जांच की जाएगी। जेल प्रबंधन को सलाह भी दी है कि उसे अन्य बंदियों से अलग रखा जाए। लगातार दवा चलने से उसकी उग्रता शांत हो जाएगी। करीब 20 दिन बाद वह अपने असली रूप में आ जाएगा।
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घटनास्थल पर जुटी भीड़ और पुलिस
- फोटो : संवाद
भूत-प्रेत का साया, तीन मौत के बाद भी घर कोई नहीं आया
झंगहा के कोइरान टोला में शुक्रवार भोर में रामदयाल ने अपने दादा कुबेर (72), उनकी पत्नी द्रौपती देवी (70) और कुबेर के बड़े भाई साधू (75) की फावड़े और कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। वह भैंस के बच्चे (पड़वा) को रावण समझकर मार रहा था, इस दौरान रोकने पर तीनों बुजुर्गों की हत्या कर दी।
आरोपी के कमरे के बाहर लगा तंत्र मंत्र
- फोटो : संवाद
इस हत्याकांड के बाद भी घर में आरोपी के पिता विजय बहादुर और मां कुसुमावती के आंखों में इस कदर खौफ था कि उनकी आंखों से जरा भी आंसू नहीं टपके। रविवार को दिन में कुसुमावती देवी घर साफ करती दिखीं। उसके घर पर न तो रिश्तेदार आए न ही गांव का कोई व्यक्ति। बताया जा रहा है कि उनके में भूत-प्रेत का साया होने के डर से लोग आने से कतरा रहे हैं। कुबेर के छोटे बेटे मेवालाल ने दाह संस्कार किया।