गुरु गोरक्षनाथ
वहीं इसमें से कुछ लोगों ने समय के साथ पार्टी बदल ली। ऐसा भी कहा जाता है कि मंदिर की छाया जिसके भी सिर से हटी, उसे लोगों ने भूला दिया। इसका सटीक उदाहरण विजय बहादुर यादव हैं, ये मंदिर के आशीर्वाद से दो बार विधायक बने और यहां का साथ छोड़ते ही पैदल हो गए। इसी क्रम में शंभू चौधरी, महंत कौशलेंद्र भी हैं।