गोरखपुर महोत्सव में बीती रात एक और बॉलीवुड गायिका अलका याग्निक एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत सुना रही थीं, वहीं उन्हें सुनने के लिए श्रोताओं की संख्या बेहद कम दिखी। इसका कारण ये बिल्कुल नहीं कि लोग उन्हें सुनना नहीं चाह रहे थे, बल्कि ये था कि आमंत्रण पत्र न होने के कारण वे पंडाल में एंट्री न कर पाए, नतीजन कुर्सियां खाली रह गईं। सोशल मीडिया से शासन तक आमंत्रण पत्रों के न बंटने की चर्चा होती रही। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपना गुस्सा जताते रहे।
विज्ञापन
2 of 5
- फोटो : अमर उजाला
तीन दिवसीय गोरखपुर महोत्सव के पहले दिन महोत्सव की खूबियों से ज्यादा आमंत्रण पत्र को लेकर शहर में चर्चाएं रहीं। फेसबुक, व्हाट्सअप से लेकर ट्विटर और शासन तक महोत्सव के आमंत्रण पत्र पर चर्चा, नाराजगी और शिकायत का क्रम चलता रहा। कार्यक्रम स्थल गोरखपुर यूनिवर्सिटी के तमाम शिक्षक, कर्मचारी और छात्र नेताओं ने आमंत्रण पत्र नहीं मिलने पर नाराजगी जताई तो वहीं व्यापारी संगठनों और उद्यमियों ने भी मुखर होकर विरोध जताया।
विज्ञापन
3 of 5
- फोटो : अमर उजाला
आमंत्रण पत्र नहीं मिलने पर कुछ प्रायोजक भी गुस्से का इजहार कर रहे हैं। उनका कहना है कि रुपये खर्च करने के बाद भी उनके परिवार तक के लिए आमंत्रण पत्र नहीं मिला जबकि कई कुर्सियां खाली रहीं। अब सवाल उठता है कि पास आखिर गए कहां? पुलिस समेत कुछ अन्य सरकारी विभागों में भी आमंत्रण पत्र नहीं मिलने पर ही चर्चा आम रही। महोत्सव में एक बड़े इवेंट के प्रभारी से जब विभाग के मातहतों ने पास मांगा तो उनका दर्द छलक पड़ा।
4 of 5
gorakhpur mahotsav
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि आमंत्रण पत्र नहीं मिलने की वजह से वह खुद महोत्सव में नहीं गए। इसी तरह कुछ पुलिस अफसरों को भी आमंत्रण नहीं मिल पाने की चर्चा पुलिस महकमे में दिन भर चलती रही। मुखर होकर आरोप लग रहे हैं कि पिछली बार की ही तरह इस बार भी गोरखपुर महोत्सव के पास जिम्मेदार लोगों ने अपने चहेतों में बांट दिए हैं। कुछ बड़े प्रायोजकों के चहेतों और सफाई कर्मचारियों तक वीआईपी पास पहुंच गए लेकिन शहर के कई प्रतिष्ठित लोगों, बुद्धिजीवियों को पास नहीं मिला। बेतियाहाता के संजीव राय, अथर्व राय, रीद्धिमा राय वापस घर आ गए, जबकि उनके पास अच्छा पास था।
सोशल मीडिया पर चल रहे कमेंट
- कमलेश- गोरखपुर की 35 वर्ष पुरानी संस्था व व्यापारिक संगठन चेंबर ऑफ ट्रेडर्स साहबगंज के पदाधिकारियों को एक भी आमंत्रण पत्र नहीं दिया गया।
- व्यापारी नेता मणीनाथ गुप्ता - व्यापार बंधु, व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ प्रशासन द्वारा गठित कमेटी के सदस्य होने के बावजूद शासन द्वारा आयोजित गोरखपुर महोत्सव का आमंत्रण पत्र नहीं मिलना दुखद और अफसोसजनक है।
- व्यापारी नेता अरशद जमाल शमानी- व्यापारिक संगठनों को मंडलायुक्त महोदय की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में बुलाया गया मगर किसी भी संगठन को आमंत्रण पत्र नहीं दिया गया। यह चिंता की बात है।