लॉकडाउन के दौरान विभिन्न प्रांतों में फंसे श्रमिकों को लेकर मंगलवार की रात करीब 10 बजे तक 14 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें पहुंचीं। इन ट्रेनों से 12210 श्रमिक और उनके परिवारवाले आए। सभी की थर्मल स्कैनिंग के बाद जलपान और भोजन कराया गया। इसके बाद लाइन लगवाकर बसों में बैठाकर गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
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- फोटो : अमर उजाला।
मंगलवार की सुबह छह बजे से ही ट्रेनों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। प्लेटफॉर्म एक, दो और नौ पर ट्रेनों को लाया गया। पहली ट्रेन बोरीवली, मुंबई से आई। शाम तक नौ ट्रेनों से आए 7810 यात्रियों को उतारा गया। इसके बाद रात दस बजे तक पांच और ट्रेनें आईं। सभी यात्रियों को लंच पैकेट और पानी को बोतलें दी गईं।
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नहीं लगने दी भीड़, सोशल डिस्टेसिंग बना रहा
पिछले कई दिनों से बसों में चढ़ने के लिए लग रही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस सुबह से ही सक्रिय हो गई। प्लेटफॉर्म से निकलते ही श्रमिकों और उनके घरवालों को लाइन में लगवाया गया। कुछ श्रमिक लाइन तोड़कर आगे बढ़े तो उन्हें सख्ती से लाइन में खड़ा कराया गया।
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प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को अस्पताल भेजा
पंजाब से मुजफ्फरपुर, बिहार जा रही श्रमिक स्पेशल में प्रसव पीड़ा से कराह रही एक महिला का डॉक्टर बुलाकर चेकअप कराया गया। एंबुलेंस से महिला को मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यात्री मित्र कार्यालय के मुताबिक, बस्ती से आगे बढ़ने के बाद कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि श्रमिक स्पेशल के एस-4 में बैठीं पिपरा, पश्चिमी चंपारण की रुखमिना देवी प्रसव पीड़ा से कराह रही हैं।
महिला के साथ पति बृजकिशोर भी थे। जिसके बाद डिप्टी एसएस कामर्शियल ने रेलवे अस्पताल में फोन करके डॉक्टर और एंबुलेंस बुला लिया। डॉक्टर ने चेकअप के बाद जरूरी दवाएं दीं और महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।