उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की राप्ती नदी वर्ष 1998 का विकराल रूप फिर दिखा सकती है, इस आशंका में लोगों की निगाहें राप्ती तट स्थित श्मशान घाट में स्थापित भगवान भोले शंकर के चरणों पर टिक गई हैं। लोगों को भरोसा है कि अब भोले ही बताएंगे कि शहर 1998 की तर्ज पर जलप्लावन का शिकार होगा कि नहीं ? यह कोई अंधविश्वास नहीं है, दरअसल 1998 की बाढ़ झेले लोगों का पैमाना है कि यदि राप्ती का पानी भगवान शंकर के पैरों तक पहुंच गया तो शहर को राप्ती के 'जल तांडव' से कोई नहीं बचा सकता। 1998 में जब प्रलयंकारी बाढ़ आई थी तो राप्ती ने भगवान शिव के पैरों को छू लिया था। बहुत सारे पुराने लोग इन दिनों रोजाना मूर्ति को देखने आते हैं। अभी पानी भगवान शिव के पैरों से काफी नीचे है लिहाजा इसी से उन्हें तसल्ली मिल जा रही है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : राजेश कुमार।
दरअसल, जब 1998 में नौसड़ के पास बांध टूटा था तो अचानक पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया था। बाढ़ के प्रत्यक्षदर्शी दक्षिणी बेतियाहाता के सुशील पांडेय बताते हैं, शहर में पहली बार बाढ़ आई थी और रुस्तमपुर हाइवे के दक्षिणी ओर के सभी घर डूब गए थे। शंकर भगवान की मूर्ति के पैर तक पानी पहुंचा था। इस बार उसी को हम लोग पैमाना मानकर चल रहे हैं।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
वहीं बुद्धनगर के अनिल सिंह कहते हैं, केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट रोजाना देख रहे हैं लेकिन आंकड़ों से अनुमान लगाना आसान नहीं है। हमारे लिए महादेव के पैर ही बेहतर निशान है। इससे नदी के बढ़ने का सही अंदाजा लग जा रहा है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : राजेश कुमार।
राप्ती पुल पर पहुंचे रहे लोग
नदी के बढ़ते ही बहुत सारे लोग राप्ती पुल पर पहुंच रहे हैं। वहीं से शंकर भगवान की मूर्ति की ओर बढ़ रहे पानी का आकलन भी कर रहे हैं। वैसे, इन शहरवासियों का भी नदी के जलस्तर का मापने का नजरिया गलत नहीं है। शहर की ओर के बांधों पर पानी का दबाव तो बढ़ा है, लेकिन 98 के हालात अभी नहीं बने हैं।
शहर से सटे बांधों पर दबाव बढ़ा, नगर निगम अलर्ट पर
राप्ती नदी के शहर से लगे बांधों पर लगातार बढ़ रहे दबाव को देखते हुए नगर निगम भी अलर्ट हो गया है। निगरानी के लिए बांधों पर स्ट्रीट लाइट लगाने के साथ ही रेगुलेटर के पास हो रहे रिसाव को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने इलाहीबाग और डोमिनगढ़ बंधे का निरीक्षण किया। इलाहीबाग रेगुलेटर से हल्का रिसाव होने पर स्थानीय लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इसे रोका नहीं गया तो कई मोहल्लों में पानी भर सकता है। दो साल पहले भी ऐसा ही हुआ था। जिम्मेदारों की लापरवाही से कई मोहल्ले पानी से घिर गए थे।