गोरखपुर में लॉकडाउन, उत्तर प्रदेश: विद्युत इंजन से चलने वाली ट्रेन में बैठे लोग।
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ट्रेन में शौचालय के लिए यात्रियों ने किया था आंदोलन
ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या शौचालय की थी। इसके लिए बड़े स्टेशनों पर ट्रेन रुकती थी। 1905 में यात्रियों ने इसके लिए आंदोलन शुरू कर दिया। यह चिंगारी पूरे देश में फैली और अंग्रेजों ने शौचालय के बारे में मंथन शुरू किया।
पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक कोच में एक सीट को नीचे से होल कर टॉयलेट का शक्ल दिया गया। लेकिन, पर्दा न होने के चलते लोग इसका उपयोग करने से हिचकते थे। यह तरकीब सफल नहीं हुई। इसके बाद एक कोना निर्धारित कर उसे घेरा गया। बाद में विस्तार कर बाकायदा कोच के दोनों ओर दो-दो शौचालय बनाए गए।