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इस अनोखी प्रेम कहानी का हुआ था खौफनाक अंत, गोरखनाथ से जुड़ा है इसका कनेक्शन

Wed, 03 Mar 2021 03:37 PM IST
vivek shukla टीपी शाही, गोरखपुर।
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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
आज हम आपको गोरखनाथ से जुड़ी एक रोचक कहानी बताने जा रहे हैं। बता दें कि गुरु गोरखनाथ के शिष्य व नाथ परंपरा के वाहक योगी अलग-अलग समय पर समाज में सुर्खियां बटोरते रहे हैं। पंजाब में पैदा रांझा भी हीर के विरह में योगी बन गए थे। दीक्षा लेने के बाद गुरु से कहा था कि मैं संसार में एक स्त्री से प्रेम करता हूं, मैंने उसकी प्राप्ति के लिए योग मार्ग अपनाया है। यदि इस बात का पता होता कि योगी के लिए प्रेम करना पाप होता है तो आप के टिले पर कभी नहीं आता। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए पूरी कहानी...
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ मंदिर से प्रकाशित पुस्तक गोरख चरित में रांझा के योगी बनने का उल्लेख है। किताब में कहा गया है कि पंजाब के लोकमानस और नाथ संप्रदाय में भी रांझा और हीर का प्रेम वृत्तांत अमिट है। कहा जाता है कि रांझा हीर के विरह में गुरु गोरखनाथ की शरण में गए। उनसे योग की दीक्षा ली। रांझा नाथ संप्रदाय की नटेश्वरी शाखा से संबंधित थे। उनकी प्रेम-योग साधना ने असंख्य लोगों को पवित्र प्रेम के पथ पर चलने की प्रेरणा दी। सूफी साधक वारिश शाह ने इस कथा को अपनी लेखनी से अमर कर दिया। इस पुस्तक में कहा गया है कि पंजाब में जब तक चिनाब नदी का जल बहता रहेगा, तब तक नाथ योगी रांझा, उसकी प्रियतमा हीर तथा गुरु गोरखनाथ की उन पर कृपा दृष्टि की कथा जीवित रहेगी।
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
यूं है कहानी
16 वीं सदी में सुल्तान बहलोल लोदी के शासन काल में तख्त हजारा में मुइजुद्दीन चौधरी नाम का एक अमीर जाट था। उसके बेटे का नाम रांझा था। उसे बांसुरी बजाने का शौक था। पिता के मरने के बाद भाभियों के कारण उसने घर छोड़ दिया। उसकी मुलाकात हीर से हुई और दोनों प्रेम करने लगे। हीर के पिता ने उसकी दूसरी जगह शादी कर दी। रांझा ने अपनी प्रियतमा को पाने के लिए योग साधना का संकल्प लिया।

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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
पता चला झेलम के टिला पर महायोगी गोरखनाथ तप कर रहे हैं। राझां ने वहां पहुंचकर बांसुरी की रागिनी छेड़ दी, जिसे सुन महायोगी की समाधि टूट गई। उसने कहा कि मेरी हीर को मुझसे अलग कर दिया गया, उसके लिए योगी बनना चाहता हूं। गुरु गोरखनाथ बोले, योग के विकट मार्ग पर चलना बहुत कठिन है। शरीर पर राख और मिट्टी मलकर उसे मिट्टी और राख में ही मिलाना योग का पहला अध्याय है। योग का आशय जीते जी मर जाना है। जीवन भर भिक्षा मांगना और स्त्री के कटाक्ष से बचना होगा। सभी स्त्रियों को मां-बहन समझना होगा।
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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
तब रांझा ने गोरखनाथ के चरण पकड़ लिए। कहा कि अब वापस मत भेजिए। उसका प्रेम देख बाबा ने उसे दीक्षा दे दी। कहा कि आने वाले कल की चिंता छोड़ दो। जिसके दरवाजे पर जाओ उसे आशीर्वाद दो। बाबा से हीर से मिलने का रास्ता पूछकर रांझा योगी उसकी ससुराल पहुंच गया। वहां प्रियतमा मृत मिली। यह देख योगी रांझे ने भी शरीर त्याग दिया।
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