अवैध ट्रेन ई-टिकट के धंधे के जरिए टेरर फंडिंग के मामले में जांच एजेंसियां जिस हामिद अशरफ को तलाश रही हैं, उसने मीडिया के लिए ऑडियो जारी कर खुद के बेकसूर बताया है। हामिद का कहना है कि उसके साथ रहे गोंडा निवासी शमशेर और सलमान उसे फंसा रहे हैं। उसने यह ऑडियो अपने मामा मो. सलीम के जरिए जारी किया है। ऑडियो में हामिद ने डीजी आरपीएफ को मेल भेजने से इनकार किया है। कहा है कि वह डीजी का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी तलाश रहा है, जिससे कि साक्ष्य भेजकर खुद को निर्दोष साबित कर सके।
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hamid ashraf
- फोटो : amarujala
हामिद के मामा का कप्तानगंज-दुबौलिया मार्ग पर मॉल है। शनिवार को अमर उजाला की टीम मामले की पड़ताल को यहां पहुंची तो मो. सलीम ने हामिद के पिता से मोबाइल पर बात की और एक ऑडियो उपलब्ध कराया, जिसमें हामिद खुद को निर्दोष बता रहा है। सलीम के अनुसार ऑडियो खुद हामिद ने भेजा है। ऑडियो में हामिद ने शमशेर और सलमान पर उसे फंसाने का आरोप लगाया है। कहा है कि पांच दिन पहले कर्नाटक पुलिस ने रेलवे की साइट हैक करने वाले गुलाम मुस्तफा को गिरफ्तार किया था।
उसके बाद डीजी आरपीएफ ने मीडिया में बताया कि गैंग का सरगना हामिद है। वह टेरर फंडिंग में भी शामिल है। उसका कहना है कि कर्नाटक में दर्ज एफआईआर में उसका नाम नहीं है। इसके बावजूद उसका नाम मामले में घसीटा गया। हामिद ने कहा है कि गोंडा में हुए बम ब्लास्ट में भी उसका हाथ नहीं था। गोंडा पुलिस शमशेर और सलमान से मिलकर उसे फंसाना चाहती हैं। हामिद के अनुसार उसने 2016 के बाद से ई-टिकट का धंधा नहीं किया। इस मामले में पर्दे के पीछे बड़े लोगों का हाथ है। इसकी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए।
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तीनों आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला।
गौरतलब है कि ई-टिकटिंग के माध्यम से आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले व टेरर फंडिंग में शामिल खातों तक जांच टीम पहुंच गई है। यूपी से बिहार तक फैले इस काले धंधे में शामिल 20 लोगों के गिरेबान तक जांच टीम के हाथ पहुंच गए हैं। जांच टीम तकरीबन दो सौ खातों को ट्रेस कर चुकी है, जिससे देश भर में लेनदेन होता था। हालांकि इन खाता संचालकों पर टीम ने अब तक हाथ नहीं डाला है, मगर जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी होगी। यूपी पुलिस, आरपीएफ व विजिलेंस टीम बिहार से सटे नेपाल सीमा पर लगातार अपनी मौजूदगी बनाई हैं।
देश भर में ई-टिकट के अवैध धंधे का जाल फैला था। इससे पहली बार आरपीएफ निरीक्षक नरेंद्र कुमार यादव ने जुलाई 2018 में इससे पर्दा उठाया था। दो यात्रियों के पास से ये टिकट बरामद हुए।
इसके बाद आरपीएफ की टीम कड़ी से कड़ी जोड़कर इस पूरे नेटवर्क को खंगालने लगी। खुलासा हुआ कि इस पूरे धंधे के माध्यम से टेरर फंडिंग किया जा रहा है, जिसका मुख्य संचालक बस्ती जिले के कप्तानगंज का रहने वाला हामिद अशरफ है। हालांकि हामिद अशरफ अभी हत्थे नहीं चढ़ा है, मगर इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए यूपी पुलिस, आरपीएफ व विजिलेंस की टीम लगा दी गई।