सरकार की ओर से इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण को लेकर किए गए दावे पर सवाल खड़ा करने वाले सपा मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को डॉ. कफील ने ही दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इस शक के आधार पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने गोपनीय जांच शुरू कर दी है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में डॉ. कफील के करीबियों की जांच की जा रही है।
आशंका है कि कथित दस्तावेज इन करीबियों ने ही डॉ. कफील को दिया होगा। इनका कॉल डिटेल खंगालने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने खुफिया एजेंसियों से भी मदद मांगी है। हालांकि अफसर इस जांच पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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कफील खान
जानकारी के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज में करीब एक साल तक डॉ. कफील कार्यरत थे। इस दौरान वह इंसेफेलाइटिस वार्ड का भी काम देखते थे। इस दौरान रिकॉर्ड कौन रखता है, कहां क्या इंट्री होती है, इससे वह पूरी तरह से परिचित हैं।
जेल से रिहाई के बाद से ही उन्होंने बगावती तेवर अपना रखे हैं। सरकार की ओर से जब भी इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण से संबंधित बयान जारी किया गया, वह इसे खारिज करते रहे हैं।
कुछ महीने पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस से मौत जारी होने का दावा किया। उन्होंने कुछ कथित दस्तावेज भी दिखाए और कहा कि जब भी जरूरत पड़ी तो नाम-पता दे सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से अखिलेश यादव के आंकड़ों को तत्काल खारिज कर दिया गया था। इसके बाद से ही मेडिकल प्रशासन ने गोपनीय जांच शुरू कर दी है।
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Dr Kafeel Khan
रिहा होने के बाद से ही सुर्खियों में हैं डॉ. कफील
गोरखपुर। जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद से ही डॉ. कफील सुर्खियों में हैं। जिस इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौत के मामले में उन्हें आरोपित बनाया गया, उसे लेकर वह देश के अलग-अलग हिस्सों में कैंप लगाने लगे। इस दौरान ही उनके भड़काऊ भाषण, अचानक सरकारी अस्पताल में निरीक्षण करने की खबरें आईं और केस भी दर्ज हुए।
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डॉक्टर कफील खान
ऑक्सीजन कांड में सात लोगों पर दर्ज हुआ था केस
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दस व 11 अगस्त 2017 को ऑक्सीजन की कमी के बीच ही बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा, स्टॉक प्रभारी व एनेस्थीसिया के हेड डॉ. सतीश कुमार, कार्यालय सहायक उदय प्रताप शर्मा, लिपिक संजय कुमार त्रिपाठी, सहायक लेखाकार सुधीर कुमार पांडेय, चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल और ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद अन्य आरोपित तो मामले से किनारे हो लिए, मगर डॉ. कफील सरकार के खिलाफ अकेले मोर्चा खोले हुए हैं।
डॉ. कफील खान की मुंबई से गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश है। अगर वह इतने ही बड़े दोषी हैं कि उन्हें मुंबई से एसटीएफ यूनिट की टीम को लगाकर गिरफ्तार करना पड़ा तो 23 जनवरी को यह टीम कहां थी? इसी दिन वह प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देवेश चुतर्वेदी के सामने बहराइच मामले में विभागीय जांच के लिए दो घंटे से अधिक समय तक रुके थे। आखिर, तब और अब में इतना बड़ा अपराध कौन सा हो गया कि उन्हें ऐसे गिरफ्तार करना पड़ा।
ये बातें डॉ. कफील के बड़े भाई अदील खान ने अमर उजाला से कहीं। उन्होंने बताया कि डॉ. कफील पर मुकदमा 12 दिसंबर को दर्ज किया गया था। इसके बाद लगातार दो दिन 23 व 24 दिसंबर को लखनऊ में थे। इस दौरान वह गोरखपुर भी आए, लेकिन पुलिस की तरफ से इस तरह की कोई कार्रवाई का अंदेशा नहीं था।