गोरखपुर शहर के 24 स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण का स्तर मानक से काफी ज्यादा है। ये स्थान मंदिरों और अस्पतालों के आसपास हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज, बेतियाहाता और आरोग्य मंदिर के आसपास इलाकों में 80 से 85 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण पाया गया है। सामान्य तौर औद्योगिक क्षेत्र का ध्वनि प्रदूषण अधिकतम 75 डेसिबल होता है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि इन स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण की स्थिति कितनी गंभीर है। इंप्रिंट (इंपैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नालॉजी) के निर्देश पर शहर में ध्वनि प्रदूषण पर रिपोर्ट तैयार करने आई आईआईटी बीएचयू की सर्वे टीम को यह प्रारंभिक जानकारी मिली है। इसके अलावा इन स्थानों पर कंपन प्रदूषण की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। शहर के ये 24 स्थान सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों ने भविष्य को लेकर चिंता जताई है। कहा है कि हालात ऐसे ही रहे तो लोग तमाम बीमारियों से ग्रसित होंगे।
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गोरखपुर शहर।
- फोटो : अमर उजाला।
आईआईटी बीएचयू के रिसर्च स्कॉलर अमरदीप पांडेय के नेतृत्व में राज यादव और अनुज पांडेय की टीम शहर के प्रमुख स्थानों और चौराहों पर ध्वनि प्रदूषण की जांच एसएलएम (साउंड लेवल मीटर) और कंपन प्रदूषण की जांच एक्सएलओ मशीन के जरिये कर रही है। यह मशीन गाड़ी और सड़क के बीच के कंपन को नापती है। बुधवार को टीम ने शहर के मोहद्दीपुर इलाके में ध्वनि प्रदूषण का स्तर जांचा। सर्वे टीम के मुताबिक शहर के चिह्नित स्थानों और चौराहों पर मानक से 20 से 25 डेसिबल ज्यादा ध्वनि प्रदूषण मिला है। कंपन की स्थिति भी बेहद खराब मिली है। इसके ज्यादा होने से भविष्य में इन इलाकों में बनी इमारतें धीरे-धीरे कमजोर होती जाएंगी। भूकंप के तेज झटके आने पर इमारतों के गिरने की आशंका बनी रहेगी।
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गोरखपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
अब तक इन स्थानों पर हुई ध्वनि प्रदूषण की जांच
शहर के मोहद्दीपुर, असुरन, पैडलेगंज, एमएमएमयूटी, गोरखनाथ, एम्स, ट्रांसपोर्ट नगर, एनएच-28, आरोग्य मंदिर, नौसड़, मऊ रोड, माया बाजार, बेतियाहाता, गीता वाटिका, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, असुरन, गोलघर, रेती चौक, ट्रांसपोर्ट नगर, कचहरी चौराहा, कालीमंदिर, पैडलेगंज, तारामंडल आदि।
एक स्थान पर तीन घंटे हो रही जांच
अमरदीप पांडेय ने बताया कि 30 दिनों के अंदर पूरे शहर के प्रमुख चौराहों की जांच करनी है। इनमें करीब 24 स्थानों की जांच कर ली गई है। एक स्थान पर तीन घंटे की जांच अलग-अलग समय पर हो रही है। सुबह, दोपहर और शाम को आंकडे़ जुटाए जा रहे हैं। एक जांच में एक घंटे का समय लिया जा रहा है।
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गोरखपुर।
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मंदिर और अस्पताल आते हैं साइलेंट जोन में
अमरदीप पांडेय ने बताया कि शहर में मंदिरों और अस्पतालों के आसपास के स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण ज्यादा है, जबकि ये स्थान साइलेंट जोन में आते हैं। यहां पर ध्वनि प्रदूषण 50 डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन गोरखपुर में ऐसा नहीं है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास 80 से 85 डेसिबल का ध्वनि प्रदूषण है।
ध्वनि प्रदूषण से कैंसर तक का खतरा
नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण को लोग नजर अंदाज कर जाते हैं, लेकिन यह बेहद खतरनाक है। ध्वनि प्रदूषण से व्यक्ति की बोलने की क्षमता जा सकती है। याददाश्त एवं एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, अवसाद, नपुंसकता और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का भी ध्वनि प्रदूषण कारण बन सकता है। कई बार रात को सोते समय कान में सीटी बजने की आवाज सुनाई देती है। एकांत में बैठने पर कानों में सनसनाहट होती है। यह सब ध्वनि प्रदूषण की वजह से होने वाली बीमारियां हैं।