प्रतीकात्मक तस्वीर
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जरूरत पर ही जांच
साल दर साल भले ही विसरा नमूनों की संख्या बढ़ रही है, मगर शायद ही किसी सैंपल को कभी उच्चस्तरीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया हो। रूटीन में विसरा को जांच के लिए नहीं भेजा जाता, मगर जहां कोर्ट केस में आर्डर होता है, उन्हीं सैंपल्स को जांच के लिए भेजने का प्रावधान है। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि विसरा को सुरक्षित रखने के कई नियम कानून हैं, लेकिन उनका पालन नहीं होता है।
यह होता है विसरा
मेडिकल टर्म में विसरा पोस्टमार्टम के दौरान एकत्र किए जाने वाले बायो सैंपल को कहते हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो फेफड़ा, किडनी, आंत, हृदय, मस्तिष्क जैसे मानव शरीर के अंदरूनी अंगों के नमूनों के संकलन को विसरा कहते हैं। नियमानुसार पुलिस विवेचना के दौरान मौत की वजह की जांच के लिए विसरा नमूने को प्रयोगशाला भेजना चाहिए, मगर ऐसा नहीं हो पाता। जिस वजह से यह पोस्टमार्टम हाउस में बंद पड़े हैं।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसको दिखवा कर जल्द से जल्द जांच कराई जाएगी। जांच कराने के लिए पत्र लिखा जाएगा।