दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया केस ने सिर्फ देश ही नहीं दुनिया को भी हिलाकर रख दिया था। तब राजपथ, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान समेत देश के कई हिस्सों में निर्भया के दोषियों को फांसी देने की मांग की गई थी लेकिन कानूनी पेंच के कारण सात साल बाद भी निर्भया के दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सका है।
एक दोषी पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी थी कि वह घटना के वक्त नाबालिग था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। पवन ने फांसी से बचने के लिए अब तक जो भी दांव खेला है, वो फेल ही रहा है, फिल्हाल उसके पास दो विकल्प मौजूद हैं।
आपको बता दें कि निर्भया के सभी दोषियों की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज जब तक सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दया याचिका खारिज नहीं कर देंगे, तब तक निर्भया के दोषी फांसी पर नहीं लटकाए जाएंगे, यानि कि सभी दोषियों के पास फांसी से बचने का कानूनी विकल्प रहेगा।