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Nirbhaya Case: दादी, बहन से मिलते ही फूट फूट कर रोया दोषी पवन, बस्ती से गहरा है नाता

Wed, 05 Feb 2020 05:52 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, बस्ती
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निर्भया की मां और दोषी पवन गुप्ता की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
निर्भया के दोषियों की एक फरवरी को होने वाली फांसी भले ही अगले आदेश तक टल गई हो, लेकिन उनका डर अभी भी बरकरार है। आपको बता दें कि निर्भया के सभी दोषियों की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज जब तक सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दया याचिका खारिज नहीं कर देंगे, तब तक निर्भया के दोषी फांसी पर नहीं लटकाए जाएंगे, यानि कि सभी दोषियों के पास फांसी से बचने का कानूनी विकल्प रहेगा।

इन्हीं दोषियों में से एक अभियुक्त पवन गुप्ता बस्ती जिले के जगन्नाथपुर का निवासी है। इससे पहले डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया के दोषी पवन से मिलने उसकी दादी, बहन और पिता पहुंचे थे। तीनों को देखकर पवन खुद को रोक नहीं पाया और फूट-फूटकर रोने लगा।
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pawan gupta - फोटो : अमर उजाला
आधे घंटे की मुलाकात के दौरान दादी अपने पोते को निहारती रही। पवन ने अपनी बहन से परिवार वालों के बारे में बातचीत की। जेल नंबर तीन में जाने के बाद चारों दोषियों में से किसी दोषी की यह पहली मुलाकात है।

जेल सूत्रों का कहना है कि जेल अधीक्षक के कार्यालय में इनकी मुलाकात करवाई गई। करीब आधे घंटे की मुलाकात हुई। इससे पूर्व मुकेश की मां और विनय के पिता भी उससे मिल चुके हैं।
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निर्भया का दोषी पवन गुप्ता - फोटो : सोशल मीडिया
बस्ती निवासी पवन के परिवार के लोग तो दिल्ली के आरकेपुरम रविदास कैंप में रहते हैं, लेकिन बस्ती के लोग इन दिनों फांसी की चर्चा सुनकर सहम से गए हैं, हालांकि कोई भी पवन गुप्ता के बारे में कुछ बोलना नहीं चाहता। उसके बचपन के दोस्त और अन्य लड़के कहते हैं कि उसे क्रिकेट का बहुत शौक था। उसने महादेवा में नमकीन बनाने की फैक्ट्री खोली लेकिन वह चल नहीं पाई। इसके बाद वह दिल्ली चला गया और वहां जूस का व्यवसाय करने लगा।

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nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
पवन कुमार के पिता बेटे को बचाने के लिए बहुत कोशिश कर रहे हैं। उसके पिता को सत्र न्यायालय से भी निराशा हाथ लगी। सत्र न्यायालय ने भी उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें निर्भया के मित्र व केस के एकमात्र गवाह पर एफआईआर दर्ज करने मांग की गई थी। पवन के पिता हीरा लाल गुप्ता ने आरोप लगाया था कि निर्भया के मित्र ने पैसे लेकर समाचार चैनलों को साक्षात्कार दिया जिससे इस मामले की सुनवाई प्रभावित हुई।
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Nirbhaya Case - फोटो : अमर उजाला
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एके जैन अपील खारिज करते हुए कहा कि यह एक निराश पिता की अपने दोषी बेटे को बचाने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश है। याचिकाकर्ता का बेटा फांसी से एक कदम दूर है, इसलिए उस पर बेबुनियाद याचिका दायर करने के लिए जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी संपादक के ट्वीट के आधार पर चश्मदीद गवाह को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता।
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