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Gorakhpur News: हीट स्ट्रोक-ड्राई आई से बचना है तो सिर और आंखें ढककर चलें

Thu, 20 Apr 2023 10:23 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि ओपीडी में हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत शुगर के मरीजों को हो रही है। शुगर के मरीज के शरीर का तापमान बदल रहे मौसम में ज्यादा तेजी से बढ़ता और घटता है।
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गोरखपुर में गर्मी। - फोटो : अमर उजाला।
तेज धूप और गर्मी शरीर को नुकसान पहुंचा रही है। धूप से शहरवासी डायरिया, हीट स्ट्रोक के साथ आंखों का पानी सूखने की समस्या का सामना कर रहे हैं। लू की वजह से प्यास ज्यादा और भूख कम लग रही है। मुंह सूखने और हल्के बुखार के साथ आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायतें आम हो गईं हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि धूप में बच्चों, बुजुर्गाें को न निकलने दें। यह धूप उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि ओपीडी में हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत शुगर के मरीजों को हो रही है। शुगर के मरीज के शरीर का तापमान बदल रहे मौसम में ज्यादा तेजी से बढ़ता और घटता है। शरीर का तापमान बढ़ेगा तो शरीर में पसीना बहुत होगा। अधिक पसीना होने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसकी वजह से लोगों को चक्कर, बैचेनी की शिकायत हो रही है। इन मरीजों में डायरिया के भी लक्षण मिल रहे हैं। हर दिन 60 से 70 मरीज बुखार, उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। अगर तीनों मेडिसिन ओपीडी की बात करें तो यह संख्या 200 के पार पहुंच रही है। ऐसे में मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वह धूप में न निकलें।
 
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गोरखपुर में गर्मी। - फोटो : अमर उजाला।
यह होता है हीट स्ट्रोक
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि शरीर का सामान्य तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। बाहरी तापमान अधिक होने से जब शरीर का तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है तो इसे ही हीट स्ट्रोक माना जाता है। हीट स्ट्रोक आमतौर पर तब होता है जब शरीर में पानी और नमक की मात्रा कम हो जाती है और पसीना आना भी बंद हो जाता है। हीट स्ट्रोक के कारण कभी-कभी इंसान कोमा में भी चला जाता है।

 
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गोरखपुर में गर्मी। - फोटो : अमर उजाला।
पुतली की नमी कम होने से बार-बार झपक रहे पलक
कड़ाके की धूप से लोगों की आंखों का पानी भी सूख रहा है। ड्राई आई के मरीजों की समस्या और बढ़ गई है। पुतली में नमी कम होने की वजह से मरीजों को बार-बार पलकें झपकानी पड़ रही हैं। खासतौर पर दिक्कतें उनकी बढ़ी हैं, जो कंप्यूटर के सामने बैठकर घंटों काम और लगातार मोबाइल चला रहे हैं।

 

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गोरखपुर में गर्मी। - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि गर्मी में बाहर निकलने पर आंखों की पुतली की नमी तेजी से वाष्पीकृत होती है। इससे आंखों का सूखापन बढ़ गया है। इसकी जांच मरीजों के शिमर टेस्ट ओर टियर ब्रेक टाइम की जांच में हुआ है। जांच में आंखों की नमी कम निकली है। इसकी वजह से आंसू ग्रंथियों को क्षमता से अधिक काम करना पड़ रहा है।

बताया कि पिछले 15 दिनों के अंदर करीब 200 मरीजों की शिमर टेस्ट और टियर ब्रेक टाइम जांच की गई। यह संख्या पहली बार अप्रैल माह में इतनी अधिक मिली है। अममून ऐसे मामले मई और जून के बीच आते हैं।

 
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गोरखपुर में गर्मी। - फोटो : अमर उजाला।
इस तरह की गई जांच
पलक के नीचे कागज की स्टि्रप लगाई जाती है। अगर स्टि्रप 10 मिमी से अधिक आंसू से भीगी तो सामान्य है। स्टि्रप के पांच से 10 मिमी के बीच भीगने पर आंख गड़बड़। सामान्य तौर पर 30 सेकेंड में एक बार पलक झपकनी चाहिए। ड्राई आई से पीड़ित मरीज तीन से पांच बार पलक झपकाता है। पलक झपकने से पुतली पर गीलापन होता है।

ड्राई आई से आंखों की रोशनी हो सकती है कम
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि ड्राई आई की वजह से आंसू आंखों को ठीक से चिकना नहीं कर पाते हैं। अगर सही समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो सूखी आंख कॉर्नियल सतह को स्थायी नुकसान पहुंचा देती है। ऐसे स्थिति में आंखों की रोशनी कम हो जाती है। धीरे-धीरे मरीजों को धुंधला दिखाई देने लगता है।

ऐसे करें गर्मी से बचाव
  • गर्मी के मौसम में सुबह 11 से अपराह्न तीन बजे तक घर से बाहर न निकलें।
  • ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और बाहर का खाना न खाएं।
  • घर से बाहर जाना पड़े तो धूप से बचने के लिए छतरी और गमछे का इस्तेमाल करें।
  • घर से निकल रहे हैं तो आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा लगाएं।
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