पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बन चुके कोरोना वायरस ने न केवल आम जन जीवन ठप कर दिया बल्कि शहर के विकास की गति पर भी ब्रेक लगा दिया है। कालेसर से जंगलकौड़िया फोरलेन का निर्माण भी ठप है। इस फोरलेन का लोकार्पण 31 मार्च को ही होना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मोहद्दीपुर से जंगलकौड़िया फोरलेन का निर्माण भी रुक गया है। जो फंड विकास को गति देने में लगानी थी, वह इस महामारी से निपटने में लग जा रहा है। जीएसटी, आबकारी, रजिस्ट्री, परिवहन जैसे विभाग जो सरकार की मोटी आय के श्रोत हैं, सब सूखे पड़ते दिख रहे हैं। पेश है अमर उजाला की पड़ताल करती खास रिपोर्ट।
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गोरखपुर में कोरोना वायरस: खाद्य कारखाना।
- फोटो : अमर उजाला
खाद कारखाना: मशीनें फंसी, ठप हो गया काम
खाद कारखाना का काम तेजी से चल रहा था। 88 फीसदी काम भी पूरा हो गया था। 14 मार्च को उवर्रक मंत्रालय की संयुक्त सचिव गुरवीन सिद्धू और कारखाने का निर्माण करा रहे एचयूआरएल के निदेशक अरुण कुमार गुप्ता ने स्विच यार्ड का लोकार्पण करने के साथ ही काम में और तेजी लाने का निर्देश दिया था। दुनिया के सबसे बड़े प्रिलिंग टॉवर का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। तमाम मशीनें पहुंच गई हैं तो कुछ लॉकडाउन की वजह से बिहार से गोरखपुर के रास्ते में ही फंस गईं। लक्ष्य था कि दिसंबर 2020 में खाद कारखाने का निर्माण कार्य पूरा कर मार्च 2021 में उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा लेकिन अब यह मुमकिन नहीं लग रहा है।
एयरपोर्ट: अब अगले साल तैयार हो सकेगा नया टर्मिनल
गोरखपुर से विमान सेवाओं में विस्तार को देखते हुए 26 करोड़ की लागत से 350 यात्रियों की क्षमता वाले नए टर्मिनल के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में थी। महीने भर में निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद थी मगर अब इसपर भी कोरोना का ग्रहण लग गया है। नए टर्मिनल का निर्माण पूरा होने में एक साल का समय लगेगा। अब ऐसे में 2021 में ही टर्मिनल का सपना साकार होने की उम्मीद है। जबतक टर्मिनल का निर्माण नहीं पूरा होता, तबतक गोरखपुर से चाहकर भी बहुत ज्यादा विमान सेवाओं में विस्तार नहीं हो सकता है।
वर्तमान में गोरखपुर से दिल्ली के लिए तीन, मुंबई, हैदाराबाद, कोलकाता, प्रयागराज के लिए एक-एक विमान सेवा है। दो विमान के बीच लैडिंग और टेक-ऑफ का अंतराल बहुत कम है। ऐसे में एक भी फ्लाइट लेट होने पर दूसरे का शेड्यूल भी प्रभावित हो जाता है जिससे 50 यात्रियों की क्षमता वाले वर्तमान टर्मिनल में अफरातफरी का माहौल हो जाता है।
चिड़ियाघर: एक महीने की देरी तय
चिड़ियाघर के निर्माण पर भी असर साफ देखा जा सकता है। इसका काम अप्रैल में पूरा होना था लेकिन अभी कामकाज पूरी तरह से ठप है। अगर समय से लॉकडाउन खत्म हुआ और सब कुछ ठीक रहा तो मई तक काम शुरू हो पाएगा। राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह का कहना है कि कोरोना की वजह से काम बंद है। इससे निर्धारित समयसीमा का बिगड़ना तय है। चिड़ियाघर के निर्माण में अभी तक कुल 213 करोड़ रुपये अभी तक खर्च हो चुके हैं। शासन से 42 करोड़ रुपये अवमुक्त होने का इंतजार था। कोरोना की वजह से फंड जारी नहीं हो सका।
एम्स का कामकाज भी बंद
एम्स के 750 बेड के अस्पताल और प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य भी बंद है। बड़ी संख्या में मजदूर चले गए हैं। कुछ मजदूर बचे हैं। यदि 14 अप्रैल को लॉकडाउन खत्म हुआ तो भी तेज गति से निर्माण कार्य नहीं शुरू हो सकेगा। मजदूरों को जुटाने में समय लगेगा। उम्मीद जताई जा रही थी कि 2021 में काम पूरा हो जाएगा लेकिन अब और ज्यादा समय लगना तय है। एम्स प्रशासन का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था। कोरोना की वजह से काम रुक गया है। जब तक लॉकडाउन हटता नहीं है और सरकार की ओर कोई गाइडलाइंस नहीं जारी होती, तब तक निर्माण कार्य नहीं शुरू कराया जाएगा।
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गोरखपुर में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
लिंक एक्सप्रेस-वे बनने की रफ्तार भी होगी धीमी
लिंक एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के पहले ही इसकी रफ्तार थम गई है। एक्सप्रेस-वे को 2022 तक बनाकर तैयार करने का लक्ष्य है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने मार्च में ही इसके निर्माण की आधारशिला रखने की योजना बनाई थी, जो फंस गई है। यूपीडा के एसीईओ ओमप्रकाश पाठक ने कहा कि निश्चित तौर पर इसके निर्माण में कुछ देर होगी। सरकार का मुख्य फोकस अभी कोरोना वायरस की चुनौतियों से निपटना है।
गोरखपुर में कोरोना वायरस: गोरखपुर नगर निगम।
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नगर निगम भवन के निर्माण में भी देरी
लॉकडाउन की वजह से नगर निगम सदन के निर्माण में भी देरी संभव है। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने इसके निर्माण के लिए पिछले महीने टेक्निकल बीड निकाली थी। इसके बाद ही लॉकडाउन हो गया। ऐसे में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। करीब 23.45 करोड़ की लागत से बनने वाले इस भवन को 2022 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन अब तक निर्माण कार्य नहीं शुरू हो सका।