उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना वैक्सीन लगाने के संबंध में तैयारियां जोरों पर हैं। वैक्सीन के रख-रखाव से लेकर उसे लगाने वाले लोगों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू हो चुका है। वैक्सीन के दुष्प्रभाव से निपटने की भी तैयारियां स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गईं हैं। इसके लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है। वैक्सीनेशन सेंटर पर डॉक्टरों की टीम के अलावा 108 और 102 एंबुलेंस मौजूद रहेंगी।
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सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी।
- फोटो : अमर उजाला
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि विधिवत ट्रायल होने के बाद ही वैक्सीन लगाने के लिए मिलेगी। ऐसे में साइड इफेक्ट की गुंजाइश न के बराबर है। फिर भी किसी को कोई दिक्कत होगी तो चिकित्सकों की टीम सभी केंद्रों पर मौजूद रहेगी। तय मानकों के अनुसार संबंधित को प्राथमिक उपचार दिया जाएगा। अगर कोई आपात स्थिति आती है तो 102 और 108 एंबुलेंस की मदद ली जाएगी। कोरोना टीका लगवाने वालों को तीन चरणों से गुजरना होगा। टीकाकरण केंद्र पर सबसे पहले प्रतीक्षा कक्ष। इसके बाद टीकाकरण कक्ष में टीका लगाया जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
हर सप्ताह होगी जांच
टीका लगवाने वाले की हर सप्ताह जांच की जाएगी। देखा जाएगा कि उन्हें कोई दिक्कत तो नहीं है। अगर कोई परेशानी होती है तो तत्काल जांच कराई जाएगी और उपचार किया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
42 दिनों तक होगी निगरानी
टीका लगने के बाद लगातार 42 दिनों तक निगरानी की जाएगी। इस दौरान प्रतिदिन फोन करके स्वास्थ्य के बारे में पूछा जाएगा। टीम लगातार मॉनिटरिंग करेगी।
टीके के बारे में कर्मियों में उलझन
जिले में कोरोना टीकाकरण जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी के अंतिम सप्ताह में शुरू होगा। पहले चरण में फ्रंट लाइन वर्कर और हेल्थ वर्करों को टीका लगाया जाएगा, लेकिन कर्मियों को उलझन है कि आखिर उन्हें कौन सा टीका लगेगा। कर्मी लगातार इसका भी पता लगा रहे हैं कि आखिर कौन से टीके का रिस्पांस बेहतर है।