योगी आदित्यनाथ। (file)
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अचानक उनके माता-पिता की नजर बेटे पर पड़ी। माता-पिता ने उन्हें योगी के रूप में देखा तो फूट-फूट कर रोने लगे। उनसे उसी वक्त घर चलने के लिए कहने लगे। जानकारी पर अवेद्यनाथ ने उन लोगों को बुलवाया और कहा कि यदि यह जाना चाहें, तो ले जा सकते हैं। वैसे आप जब चाहें, तब आ सकते हैं। संन्यास की एक परंपरा है। जब तक संन्यासी अपने परिवार से भिक्षा नहीं ले लेता है, तब तक उसकी तपस्या अधूरी मानी जाती है। योगी कुछ दिनों बाद दिग्विजयनाथ महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य के साथ अपने गांव गए और माता-पिता से भिक्षा लेकर वापस आए।