प्रतीकात्मक तस्वीर।
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डॉ. अनुराग ने बताया कि पहले चरण के कैंसर में अधिकतर मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन तीसरे और चौथे चरण में लंबी दवा चलानी पड़ती है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशान होना पड़ता है। मौजूदा समय में 200 से 250 मरीज ओपीडी में जांच के लिए आ रहे हैं। कोरोना से पूर्व यही संख्या 400 से 500 के बीच रहती थी। ऐसे में जो मरीज समय पर इलाज के लिए नहीं आ पा रहे हैं, उनके लिए यह बेहद खतरनाक है।