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काला मोतियाबिंद में आंखों की नसों (ऑप्टिक नर्व) पर दबाव पड़ता है, इससे उन्हें काफी नुकसान पहुंचता है। लगातार दबाव पड़ने से नर्व तक ब्लड की सप्लाई नहीं पहुंचती है, इससे नर्व नष्ट हो जाती है। इसी ऑप्टिक नर्व के जरिए सूचनाएं और चित्र दिमाग तक पहुंचता है। यदि ऑप्टिक नर्व और आंखों के अन्य भागों पर पड़ने वाले दबाव को कम न किया जाए, तो आंखों की रोशनी चली जाती है।
एक बार अगर काला मोतियाबिंद से आंखों की रोशनी चली गई, तो दोबारा रोशनी नहीं मिलती है। बताया कि इस बीमारी का शिकार 40 से 45 वर्ष के युवा भी हो रहे हैं। तीन से चार युवा ऐसे मिले हैं, जिनकी आंखों की रोशनी 70 फीसदी से अधिक जा चुकी है। इनकी सर्जरी भी अब नहीं हो सकती है। दवा देकर इलाज किया जा रहा है।