फर्जी आईएएस की गिरफ्तारी के कुछ देर बाद ही उसकी प्रेमिका ने स्टेट्स पर फोटो लगाकर लिखा 'मिस यू जानू...'। स्टेट्स का स्क्रीनशॉट कुछ ही देर में वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस भी हैरान रह गई।
फर्जी आईएएस बनकर करोड़ों की ठगी के आरोपी गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर की गिरफ्तारी के बीच एक दिलचस्प जानकारी सामने आई है। पुलिस टीम जब उसे उसके साथियों सहित गिरफ्तार कर रही थी, उसी दौरान बिहार में रहने वाली उसकी प्रेमिका ने अपने व्हाट्सएप स्टेट्स पर गौरव का फोटो लगाकर "मिस यू जानू" लिख दिया।
स्टेट्स का स्क्रीनशॉट कुछ ही देर में वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस भी हैरान रह गई कि उसकी गिरफ्तारी की खबर इतनी जल्दी उसके नजदीकी सर्किल तक पहुंच गई।
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फर्जी आईएएस गौरव कुमार सिंह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जानकारी के अनुसार, गौरव की यह प्रेमिका बिहार के उसी क्षेत्र से है, जहां उसका मूल परिवार रहता है। बताया जाता है कि फर्जी आईएएस गौरव अक्सर अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व, अफसरों जैसे व्यवहार और चमकदार लाइफ स्टाइल से लोगों को प्रभावित करता था।
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फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खुद को 2022 बैच का आईएएस बताकर वह सोशल मीडिया पर भी बड़ी छवि बनाए हुए था, जिससे कई लोग उसके झांसे में आ जाते थे। इसी छवि के चलते वह युवती भी उसके संपर्क में आई थी। गिरफ्तारी के दौरान लगाए गए स्टेट्स की चर्चा पुलिस लाइंस से लेकर सोशल मीडिया तक फैल गई।
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फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह स्टेस्स जांच का हिस्सा नहीं है, लेकिन इससे इतना साफ है कि गौरव अपने निजी जीवन में भी आईएएस की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहा था।
कई लोगों को अपनी झूठी कहानी से प्रभावित कर चुका था। पुलिस अब गौरव के करीबियों, उसके संपर्कों और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसकी जालसाजी की जड़ें कितनी गहरी हैं।
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फर्जी आईएएस के पड़ोसी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
व्यापारी के डर से छह महीने गोरखपुर में छिपा, पड़ोसियों पर छोड़ रखा था अधिकारी वाला प्रभाव
बिहार के मोकामा निवासी व्यापारी मुकुंद माधव के पांच करोड़ रुपये फंसने के बाद वह लगातार गौरव पर दबाव बना रहा था। इसके डर से गौरव लखनऊ छोड़कर गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र में किराए के मकान में पत्नी और दो बच्चों के साथ रहने लगा। घर के बाहर आईएएस गौरव कुमार का बोर्ड लगा था।
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फर्जी आईएएस का घर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पड़ोसी रामप्रीत, आकाश और सरोजनी यादव ने बताया कि गौरव का व्यवहार तो सामान्य था, लेकिन उसके घर के बाहर अक्सर असलहा लिए गार्ड और चार-पांच गाड़ियां खड़ी रहती थीं, जिससे मोहल्ले में उसका रौब बना रहता था। पड़ोसी अजय के मुताबिक, उसके गार्ड असम और कोलकाता के थे। उसके रहन-सहन और चाल-ढाल से कभी नहीं लगा कि वह एक बड़ा जालसाज है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी फर्जी आईएएस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कोचिंग टीचर से ठग बना शातिर, फर्जी पहचान और रुतबा दिखाकर लोगों के करता था करोड़ों की ठगी
गोरखपुर में 200 करोड़ रुपये का सरकारी ठेका दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार की लग्जरी लाइफ और ठगी के नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी का मासिक खर्च 5 लाख रुपये से अधिक था।
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फर्जी आईएएस की लाल बत्ती लगी गाड़ी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खुद को 2022 बैच का आईएएस बताने वाला ललित किशोर महंगी गाड़ियों, 10 गनरों, निजी मैनेजर, किराए के होटल और एलीट लाइफस्टाइल के दम पर लोगों को आसानी से भरोसे में ले लेता था। शातिर ठग ललित किशोर मूलरूप से सीतामढ़ी (बिहार) के मेहसौल का रहने वाला है।
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गनर के साथ चलता फर्जी आईएएस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले सीतामढ़ी में सुपर 100 कोचिंग सेंटर में गणित का शिक्षक था। वर्ष 2023 में वह एडमिशन के नाम पर दो लाख रुपये लेने के आरोप में कोचिंग से निकाल दिया गया। एमएससी के बाद वह मैथ से पीएचडी कर रहा था, लेकिन इसी दौरान उसने फर्जी पहचान और दिखावे के सहारे ठगी का रास्ता अपना लिया।
वर्ष 2016 में उसके खिलाफ सीतामढ़ी के रीगा थाने में युवती को बहला फुलसा कर भाग ले जाने के मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जो वर्तमान में उसकी पत्नी है। जिससे दो बच्चे भी हैं। पिछले पांच महीनों से वह चिलुआताल थाना क्षेत्र में किराए के मकान में पत्नी, दो बच्चों और साले के साथ रह रहा था।
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फर्जी आईएएस के घर लगी नेमप्लेट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किराए पर गनर, मैनेजर और महंगी गाड़ियां
एसपी सिटी के अनुसार ललित हमेशा 10-12 गनरों के साथ चलता था। प्रत्येक को वह 30 हजार रुपये मासिक देता था। इसके अलावा उसने एक मैनेजर रखा था, जिसे 60 हजार रुपये महीने मिलते थे। उसके पास स्कॉर्पियो और अर्टिगा दो लग्जरी वाहन थे, जिनकी 30-30 हजार रुपये ईएमआई हर महीने जमा करता था। गोरखपुर के होटलों में वह 30 हजार रुपये मासिक रूम रेंट खर्च करता था। यहीं नहीं सरकारी अधिकारी जैसी छवि बनाने के लिए वह सरकारी कार्य पर लिखी निजी गाड़ियों का इस्तेमाल करता था। जहां भी जाता, गनरों की टोली और स्टाफ लेकर पहुंचता, जिससे लोग उसे असली आईएएस समझ लेते थे।
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फर्जी आईएएस का घर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक पत्नी और चार प्रेमिकाएं, तीन गर्भवती
जांच में सामने आया है कि आरोपी की निजी जिंदगी भी उतनी ही चौंकाने वाली है। उसकी एक पत्नी व चार प्रेमिकाएं हैं। जिसमें तीन गोरखपुर और एक सीतामढ़ी की रहने वाली है। जिनमें तीन गर्भवती पाई गई हैं। आरोपी जालसाज इन सभी पर वह महंगे मोबाइल, ज्वैलरी और लाखों रुपये खर्च करता था। महंगे कपड़े और ब्रांडेड चीजों का शौकीन आरोपी अपने आपको हाई प्रोफाइल अधिकारी दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ता था।
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Fake IAS Officer
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
चिलुआताल में किराए के मकान में चल रहा था पूरा खेल
पिछले पांच महीनों से आरोपी अपनी पत्नी, दो बच्चों और साले के साथ चिलुआताल थाना क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। यहीं से वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से ठगी का नेटवर्क चला रहा था। वह पिछले पांच माह में भटहट, पीपीगंज, कैम्पियरगंज और अन्य क्षेत्रों के स्कूलों में भी फर्जी आईएएस बनकर निरीक्षण करने गया था। छात्रों की बोर्ड परीक्षा के दौरान वह दो लग्जरी गाड़ियों और गनरों के काफिले के साथ पहुंचा था। हालांकि अभी तक स्कूलों से धन उगाही की शिकायतें नहीं आई हैं।
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फर्जी आईएएस ललित किशोर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे
- फोटो : अमर उजाला
दस्तावेज बनाने के लिए एआई तकनीक का करता था इस्तेमाल
आरोपी एआई तकनीक का इस्तेमाल कर मीटिंग लेटर, मंत्रालय के नोट, नियुक्ति आदेश, अनुमोदन पत्र, दिखाकर वह पीड़ितों को पूरी तरह भ्रमित कर देता था। यहीं नहीं लोगों को झांसे में लेने के लिए एआई तकनीक की मदद से अधिकारियों की मीटिंग से उनका फोटो हटा अपना फोटो लगा देता था। आरोपी के पास से देवरिया जिलाधिकारी की मीटिंग का भी फोटो बरामद हुआ है।
एसएसपी के निर्देश पर पुलिस आरोपी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कौन शामिल था और अब तक उसने कितने लोगों को निशाना बनाया है।-अभिनव त्यागी, एसपी सिटी