जिंदा रहने का सबूत देने के लिए अब पेंशनरों को नवंबर या दिसंबर महीने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कोई भी पेंशनर साल में कभी भी जीवित प्रमाण पत्र जमा कर सकता है। बस ये ध्यान रखना होगा कि जिस महीने प्रमाण पत्र जमा किया गया हो अगले साल भी उसी महीने की संबंधित तारीख तक प्रमाण पत्र जमा कर दिया जाए वर्ना पेंशन रोक दी जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
मसलन अगर किसी पेंशनर ने 10 अक्तूबर को प्रमाण पत्र जमा किया है तो अगले साल भी 10 अक्तूबर तक प्रमाण पत्र जमा कर दें। पेंशनरों के सत्यापन के साथ ही पेंशन गलत हाथ में जाने से रोकने के लिए पहले हर साल नवंबर महीने में कलेक्ट्रेट स्थित कोषागार कार्यालय में जीवित प्रमाण पत्र जमा कराया जाता था। 17 दिसंबर यानी पेंशनर्स डे तक प्रमाण पत्र जमा करने की आखिरी तिथि तय की गई थी।
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समय सीमा तय होने की वजह से कोषागार कार्यालयों में पेंशनर्स की लाइन लग जाती थी जिससे संबंधित पटल पर काम का लोड तो बढ़ ही जाता था कि पेंशनर्स भी परेशान होते थे। दूर-दराज के अधिक उम्र वाले पेंशनरों को कोषागार कार्यालय तक पहुंचने में भी तमाम तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मौसम की मार अलग से।
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इन सभी दिक्कतों को देखते हुए ही पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए वर्ष में किसी भी महीने में जीवित प्रमाण पत्र जमा करने की व्यवस्था कर दी गई। यही नहीं प्रमाण पत्र जमा करने के लिए पेंशनरों को कोषागार कार्यालय भी आने की जरूरत नहीं। वे अपने खाते वाले संबंधित बैंकों से भी प्रमाण पत्र भेजवा सकते हैं।
-पेंशनर साल में कभी भी जीवित प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कोषागार कार्यालय भी आने की जरूरत नहीं। उनके जिस बैंक में भी खाते हैं वहां के प्रबंधक से सत्यापन कराकर वे जीवित प्रमाण पत्र जमा करा सकते हैं। - जनार्दन प्रसाद पांडेय, मुख्य कोषाधिकारी