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अमर उजाला मोहल्ला डायरी: गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर हुआ था गोरखनाथ मोहल्ले का नामकरण

Fri, 03 Feb 2023 03:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर बहुत पहले बिखरे हुए गांव का समूह था। यह धीरे-धीरे विकसित होकर नगर बन गया। नगर बनने के बाद सुविधा और पहचान की दृष्टि से इसे कई मोहल्लों में विभक्त किया गया। अलग-अलग मोहल्लों को भिन्न-भिन्न नामों से जाना पहचाना जाता है।

गोरखपुर नगर के उत्तरी भाग को गोरखनाथ मोहल्ले के नाम से जाना जाता है। इसे पुराना गोरखपुर कहा जाता है और यह मोहल्ला सबसे पुराना भी है। कहा जाता है कि बंगाल नरेश देव पाल के शासनकाल (810-850 ई.) में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा नामक स्थान से गुरु गोरक्षनाथ यहां आए थे।

 
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गोरखनाथ मंदिर - फोटो : amar ujala
उस वक्त यह क्षेत्र घने जंगलों से भरा हुआ था। राप्ती नदी उस समय वर्तमान गोरखनाथ मंदिर के उत्तर से बहती थी। गोरखनाथ जी को यह स्थान पसंद आया और उन्होंने इसे अपने तपस्थली बना ली। उनके तप और तेज के प्रभाव से इस नगर को उनके नाम से जाना जाने लगा।

 
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
उनके नाम की प्रसिद्धि से पहले इसे राम ग्राम और पिप्पलीवन नाम से जाना जाता था। लोक विश्वास है कि मंदिर परिषद में जो अखंड धूनी जलती रहती है उनके वक्त की है। उस धूनी के सटे दक्षिण में पहले एक साधारण सा मंदिर होता था। उसी स्थान पर बाद में वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।

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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ मोहल्लों में मुगलों के शासन काल में मुस्लिम आबादी का अधिवास हुआ। मंदिर के प्रायः हर तरफ सघन मुस्लिम आबादी है। रसूलपुर और दशहरी बाग तो उन्हीं से आबाद है। इन मोहल्लों में पहले करघा यानी हैंडलूम का बड़ा कारोबार होता था, जो अब कमजोर पड़ गया है।

 
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गोरखनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करते सीएम योगी। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
आजादी के बाद इस मोहल्ले में सिंधी नागरिकों का शरणार्थियों के रूप में आगमन हुआ। आज यहां विजयनगरम के नाम से व्यवस्थित बड़ी कॉलोनी है। गोरखनाथ मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से गोरखपुर जनपद की भांति गोरखनाथ मंदिर और गोरखनाथ मोहल्ला दोनों ने अपनी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है।
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