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गणेश चतुर्थी के बाद क्या आता है सबसे बड़ा बदलाव? देखें मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त और राशिफल

Tue, 14 Jan 2020 05:58 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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गणेश चतुर्थी पर सुहागिनों ने पुत्र की लंबी आयु के लिए पूजा कीं। - फोटो : अमर उजाला
गणेश चतुर्थी पर सुहागिनों ने पुत्र की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निराजल व्रत रखा। ग्रंथों के मुताबिक इसे ‘तिलकुटा चौथ’ और ‘संकष्टी चतुर्थी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि को श्रीगणेश का जन्म हुआ था। इसलिए इसे श्रीगणेश जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। पूजा में दूर्वा, शमी पत्र, बेल पत्र, गुड़ और तिल के लड्डू को चढ़ाया जाता है। सोमवार को महिलाओं ने स्नानादि के बाद प्रथम पूज्य गणेश भगवान का पूजन अर्चन किया। पूरा घर बैठकर इन कहानियों को सुनता है। इसके बाद तारों की छांव या चंद्रमा के उदय के साथ अर्घ्य दिया जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
कहीं कहीं महिलाएं इस व्रमा का पारण अर्घ्य के साथ ही कर लेती हैं। तो कहीं वह अगले दिन व्रत का पारण करती हैं। इस दौरान शहर के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालु उमड़े और प्रतिमाओं के दर्शन किए। पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि भविष्य पुराण में कहा गया है कि मनुष्य जब भारी संकट में हो, उसे संकष्टी चतुर्थी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत को करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

क्या कहती हैं महिलाएं

संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हूं। बप्पा के आशीर्वाद से परिवार नित्य प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहा है।
अनुराधा मिश्रा, रुस्तमपुर

गणेश चतुर्थी के पावन दिन गणपति की आराधना करने से विशेष वरदान हासिल होता है। सभी तरह की समस्याएं दूर होती हैं।
सरोज चंद, रानीडीहा

प्रथम पूज्य गणेश में गहरी आस्था है। इसलिए व्रत को करती आ रही हूं। पूरे परिवार का इसमें सहयोग मिलता है।-अनिता देवी, जेल रोड

ये व्रत मुख्य रूप से संतान के लिए होता है। संतान और खुशहाली के लिए सभी माताएं ये व्रत रखती हैं। इस व्रत से सभी कष्ट दूर होते हैं।
शालू श्रीवास्तव, गीता वाटिका
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शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य

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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
पंडित घनश्याम पांडेय ने बताया कि सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही विवाह, नूतन गृह प्रवेश, नया वाहन, भवन क्रय-विक्रय, मुंडन जैसे शुभ कार्य शुरू हो होंगे।
 
दान-दक्षिणा का विशेष महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि इस दिन किया गया दान पुण्य और अनुष्ठान अभीष्ठ फल देने वाला होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव जब मकर राशि में आते हैं तो शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा बरसती है। इस कारण मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं का दान शनिदेव की विशेष कृपा को घर परिवार में लाता है। ज्योतिर्विद मनीष मोहन ने बताया कि संक्रांति के साथ ही मनमास समाप्त हो जाएगा।
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मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

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- फोटो : rashifal 2020
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सुबह 07:54 बजे हो रहा है जिसके बाद शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएगा।

मकर संक्रांति के अनुसार राशि फल

मेष : ईष्ट सिद्धि
वृष : धार्मिक लाभ
मिथुन : कष्टप्रद
कर्क : सम्मान
सिंह : भयप्रद
कन्या : ज्ञान वृद्धि
तुला : सुखवृद्धि
वृश्चिक :  लाभ
धनु : संतोषप्रद
मकर : आर्थिक सुख
कुंभ : हानि,भय
मीन : उन्नति
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