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आसमान में इस दिन दिखेगी मनमोहक आतिशबाजी, हर घंटे नजर आएंगे 15-20 उल्का पिंड

Thu, 23 Jul 2020 02:29 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
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Astronomical event - फोटो : Social media
आसमान में प्रकृति की आतिशबाजी देखना एक जबरदस्त और अद्भुत अनुभव होता है। यह अद्भुत नजारा 28-29 जुलाई की रात को आसमान में देखा जा सकता है। जब प्रति घंटे 15-20 उल्का पिंड और कुल मिलाकर 50 या उससे अधिक उल्का पिंडों की बारिश होगी। रात 12 से 1 बजे के बीच इस अनोखी खगोलीय घटना का लुत्फ नंगी आंखों से उठाया जा सकेगा।
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meteorite - फोटो : New York Post
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद् अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी अपने अक्ष  पर घूमते हुए सूर्य का चक्कर लगाने के दौरान सोलर सिस्टम में मौजूद छोटे खगोल पिंडों के मलबे पृथ्वी के वायुमंडल में घुसने की कोशिश करते हैं। धरती के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान ये घर्षण की वजह से जलने लगते हैं। जिस वजह से ये नजारा देखने लायक होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
उन्होंने बताया कि उस दिन चांद का आकार 66 फीसद होने कारण उल्का वृष्टि के नजारे को चंद्रमा के अस्त होने के बाद ही बखूबी देखा जा सकेगा। कोरोना महामारी के चलते प्रदूषण का स्तर भी घटा है, जिसके बाद आकाश में होने वाली ये खगोलीय घटनाएं और साफ नजर आने लगीं हैं।

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Astronomical event - फोटो : Social media
इससे पहले अप्रैल के महीने में कई दिनों तक आकाश में उल्का पिंड की बारिश के नजारें देखने को मिले थे। बड़ी संख्या में लोगों ने आसमान में चमकदार रोशनी बिखेरने वाली इस उल्का वर्षा का आनंद लिया था।
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Astronomical event - फोटो : Social media
धरती से 80 किलोमीटर ऊपर जल जाते हैं उल्का पिंड
सोलर सिस्टम के निर्माण के दौरान जो छोटे खगोलीय पिंड बड़े ग्रह बनने से बच गए थे, ये सभी ग्रह और धरती की तरह की सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उन्हें विज्ञान की भाषा में उल्का पिंड या टूटता हुआ तारा कहा जाता है। ये लोहा, सिलिका, निक्किल, सिलिकेट से बने होते हैं। वायुमंडल के प्रवेश के बाद ये धरती से 80 किलोमीटर की दूरी पर धर्षण की वजह सेे जलने लगते हैं।

 
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