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Teachers' Day: प्रशासनिक, पुलिस अफसर व शिक्षाविदों ने गुरुओं को किया याद, बोले- जीवन को आसान बनाते हैं शिक्षक

Mon, 05 Sep 2022 01:04 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले में तैनात प्रशासनिक, पुलिस अफसर व शिक्षाविदों ने शिक्षक दिवस (पांच सितंबर) पर अपने-अपने गुरुओं को याद किया। साथ ही अपनी स्मृतियों को साझा करके पुरानी यादों में खो गए। ज्यादातर ने कहा कि गुरुओं के बताए रास्ते पर चले और अपना मुकाम हासिल कर लिया। यह मूल मंत्र हर व्यक्ति को याद रखना चाहिए। माता-पिता के अलावा शिक्षक ही ऐसे होते हैं, जो कि कठिन रास्ते पर चलने का आसान तरीका बताते हैं। इससे भविष्य संवरता है।  
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गोरखपुर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर। - फोटो : अमर उजाला।
आसान भाषा में पढ़ाई से बढ़ी बायोलॉजी में रुचि
11वीं में बायोलॉजी की क्लास कर रहा था। शिक्षक एसके सयाल इतनी आसान भाषा में पढ़ाने लगे कि इस विषय में रुचि और बढ़ गई। नतीजा रहा कि मेडिकल फील्ड को चुन लिया। एमबीबीएस करके डॉक्टर बना। शिक्षक के बताए राह पर चला तो कोई दिक्कत नहीं आई। पढ़ाई पर ध्यान दिया और लक्ष्य की तरफ बढ़ते चले गए। डॉक्टर बनने के बाद लगा कि कुछ और करना चाहिए। लिहाजा, प्रशासनिक सेवा की तैयारी की। अब आईपीएस बनकर लोगों के दुख-दर्द को बांट रहा हूं।   -डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी

 
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प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति, एमएमएमयूटी - फोटो : अमर उजाला।
गणित का आसान फार्मूला हर समस्या का समाधान
वैसे तो जीवन में सबसे बड़े शिक्षक माता-पिता ही हैं। लेकिन, राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में शिक्षक थे सदाशिव गुप्त, 10 वीं में गणित पढ़ाते थे। कठिन सवालों को सरल तरीके से हल करना सिखाते थे। उनकी अपनी तकनीक बहुत ही सरल थी। यह मेरे जीवन में बड़ा सबक था। कठिन से कठिन समस्या का समाधान उनके ही फार्मूले पर आसानी से कर लेता हूं। मेरे लिए उनकी सीख हमेशा प्रेरणा की काम करती है। -प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति, एमएमएमयूटी

 

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पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार मिश्र। - फोटो : अमर उजाला।
शिक्षकों ने रखी मजबूत नींव
प्रारंभिक शिक्षा सेंट्रल स्कूल, दिल्ली से हुई है। मेंटल मैथमेटिक्स की पढ़ाई होती थी। खड़े होकर क्लास में सवालों का जवाब देते थे। इससे मेरा गणित बहुत तेज हो गया। पुरी मैडम थीं, जो साइंस बहुत अच्छा पढ़ाती थीं। थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल करवा कर समझाती थीं। अंग्रेजी की टीचर वसुंधरा सप्रे मैडम थीं। बेहद अनुशासित थीं। सबने अपनी कुशलता से मेरी नींव इतनी मजबूत कर दी थी कि जिसका फायदा हायर एजुकेशन में हुआ। -अशोक कुमार मिश्र, महाप्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे

 
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पवन अग्रवाल, सीईओ, गीडा। - फोटो : अमर उजाला।
सीनियरों के मार्गदर्शन से मिली कामयाबी
प्रारंभिक शिक्षा से लेकर स्नातक स्तर की शिक्षा तक कई ऐसे गुरु मिले, जिन्होंने मुझे विशेष सांचे में ढाल दिया। इससे भविष्य की राह आसान हुई। स्नातक के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी में कई सीनियरों का मार्गदर्शन मिला, जिन्हें सीनियर गुरु कह सकते हैं। भविष्य को संवारने में हर शिक्षक की भूमिका अहम होती है। माता-पिता का आशीर्वाद भी काम आया है।-पवन अग्रवाल, सीईओ, गीडा
 
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नगर आयुक्त प्रेम रंजन सिंह। - फोटो : amar ujala
माता-पिता ने संस्कार तो शिक्षकों ने पढ़ाया अनुशासन का पाठ  
घर में माता- पिता और स्कूल में शिक्षक भविष्य संवारते हैं। माता-पिता संस्कार तो शिक्षक, अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं। एक औसत विद्यार्थी था, लेकिन कठिन परिश्रम, लगन गुरुजनों व माता पिता के आशीर्वाद से आज इस मुकाम पर हूं । यह कहना तो ठीक नहीं रहेगा कि भविष्य की राह आसान करने और सफलता दिलाने में किसी एक या दो शिक्षक की ही भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। हर कक्षा व हर विषय के शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। हां, पसंदीदा शिक्षक की बात करें तो शहर के एमजी इंटर कॉलेज के रसायन विज्ञान के पीएस श्रीवास्तव का नाम मैं, लेना चाहूंगा। उनके सरल स्वभाव और पढ़ाने का तरीका ऐसा रहा कि पाठ आसानी से समझ में आ जाता। प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर में ही पूरी हुई है। -प्रेमरंजन सिंह, उपाध्यक्ष, जीडीए
 
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नगर आयुक्त अविनाश सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
हर शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण
भविष्य को संवारने में हर शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता के बाद शिक्षक ही हैं, जो कठिन रास्ते पर आगे बढ़ने की सीख देते हैं। जो व्यक्ति रास्ते पर आगे बढ़ता है, उसे जरूर सफलता मिली है। यह मूल मंत्र हर व्यक्ति पर लागू होता है। हमारे पहले गुरु माता-पिता हैं। हर कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षकों ने प्रेरित किया है। -अविनाश सिंह, नगर आयुक्त
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