अंग्रेजी समाज में जीरो फिगर की लालसा कायम रही है। यहां बच्चे होने के बाद भी शरीर के किसी हिस्से पर जरा सा भी मांस नहीं चढ़ा होना चाहिए। खासकर रॉयल सेलेब को तो इस मसले पर खास ध्यान रखना पड़ता है। कैट भी बिल्कुल ऐसी ही हैं लेकिन भारत में जीरो फिगर का मसला फ्लॉप हो चुका है।
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केट पर क्यों नहीं जचेगी साड़ी
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वैसे भी साड़ी संयमित कामुकता का प्रतीक मानी गई है। ऐसा वस्त्र जिसे पहनने के बाद भी किसी के मन में कामुकता जागे। साड़ी भारत में संयमित कामुकता के पक्ष के साथ पूरी तरह इंसाफ करती है। सुडौल शरीर पर उभरे वक्ष पर झीना पल्ला और नाभि दर्शाती कमर पर घेरेदार प्लेटों वाली साड़ी, डीप नेक ब्लाउज या चोली उसी संयमित कामुकता का हिस्सा है।
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केट पर क्यों नहीं जचेगी साड़ी
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फैशन रैंप पर जिस तरह सब्यसाची ने जिन डिजाइनर साड़ियों की वापसी कराई है, उन साड़ियों में उन्नत वक्ष, पतली कमर और चौड़े कूल्हों पर नाभि दर्शना एक परफेक्ट फिगर माने जाते हैं। दबंग के बाद तो बॉलीवुड में भी भोजपुरी देह के मायने बढ़े हैं।
केट पर क्यों नहीं जचेगी साड़ी
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इसी सिलसिले में विद्या बालन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि साड़ी पहनने वाली भारतीय औरतों की तुलना प्राचीन काल की भारतीय मूर्तियों से की जा सकती है। यूं भी पश्चिम में मांसल सौंदर्य के पैमाने अलग होने के कारण औरत और मर्द एक जैसे नजर आते हैं।
ऐसे में बेहद दुबली, सपाट वक्ष और कूल्हों वाली कैट पर साड़ी कहां से जंचेगी। अच्छा किया जो कैट ने साड़ी नहीं पहनी क्योंकि इससे पहनने के लिए कर्व चाहिए जो भारतीय महिलाओं में ही दिखेंगे।