33 साल की गिमा फ्लेनागन ने हमेशा अपनी सपनों की दुनिया ही जी है। लेकिन उनके सपने उस समय टूट गए जब उन्हें Guillain-Barre Syndrome नाम की बीमारी हो गई और उन्हें कहा गया कि अब उन्हें अपनी पूरी जिंदगी व्हीलचेयर पर ही बितानी पड़ेगी।
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लेकिन आज मिस फ्लेनागन लंदन की उन मॉडल्स में से एक हैं जो लंदन लेबल स्केनटिली के रचनात्मक कैंपेन में भाग लेती हैं।
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वो लोगों की मॉडल्स के प्रति मानसिकता को तोड़ना चाहती हैं कि केवल सेक्सी और अच्छे फिगर वाली महिलाएं ही मॉडलिंग कर सकती हैं।
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वो चाहती हैं जो लड़कियां जो दिखने में साधारण हैं या शारीरिक रूप से अक्षम हैं वो अपने मॉडलिंग के सपने को मारे ना बल्कि अपने सपने को पूरा करने के लिए वो सब करें जो वो कर सकती हैं।
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वो बताती हैं कि मैंने अपनी पहचान को फिर से पा लिया है और अपने शरीर को प्यार करना सीख लिया है। मुझे अपनी कमजोरी पर गर्व है जिसे मैं अब अपनी ताकत बना चुकी हूं।