बांधनी प्रिंट की साड़ी और कपडों का क्रेज इस समय खूब है। रंगीन छोटे-छोटे प्रिंट साड़ी और दुपट्टे पर जरूर देखे होंगे। इन्हें ही बांधनी प्रिंट कहते हैं। गुजरात और राजस्थान की ट्रेडिशनल स्टाइल आजकल हर जगह मशहूर हो रही है। सेलिब्रेटीज भी इस प्रिंट के कपड़ों में नजर आते हैं। यहीं नहीं सेलिब्रेटीज ट्रेडिशनल के साथ ही वेस्ट्रन आउटफिट में भी इस खास प्रिंट को पसंद कर रहे हैं और ये प्रिंट लेटेस्ट ट्रेंड बन गया है। ईशा अंबानी ने अपनी मां की बांधनी प्रिंट की चुनरी को शादी के मौके पर अपने ब्रांड न्यू लहंगे के साथ मैच किया था। हालांकि केवल बांधनी ही नहीं एक और खास तरह का कपड़ा भी है जो सेलिब्रेटीज की पहली पसंद है। बांधनी की तरह ही पाटन पटोला साड़ी और कपड़े का भी क्रेज सितारों पर दिखता है।
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patola saree
- फोटो : instagram
गुजरात की बांधनी प्रिंट के साथ ही पटोला साड़ियां भी काफी मशहूर हैं। इन कपड़ों का इतिहास भी काफी पुराना है। पटोला गुजरात की एक प्रकार की रेशमी साड़ी होती है। जिसे बुनाई से पहले ही निर्धारित जगहों पर गांठकर रंग दिया जाता है। गुजरात की ट्रेडमार्क पटोला साड़ी अपने बनाने की विधि की वजह से काफी महंगी मानी जाती है। इस कपड़े को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला रेशमी धागा कर्नाटक या पश्चिम बंगाल से खरीदा जाता है। जिसकी वजह से इस कपड़े की लागत कई गुना बढ़ जाती है।
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पाटन पटोला साड़ी का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि सोलंकी वंश के राजा कुमारपाल ने महाराष्ट्र के जलना से बाहर बसे 700 पटोला बुनकरों को पाटन में बसने के लिए बुलाया था। उस समय राजा खास अवसरों पर पटोला सिल्क का पट्टा पहनते थे। पाटन में केवल तीन ऐसे परिवार हैं जो ओरिजनल पाटन पटोला साड़ी का कारोबार करते हैं। इस विरासत को आगे बढाने के कारण इन्हें जीआई टैग भी मिला हुआ है।
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पटोला कपड़े की खासियत होती है कि इसे दोनों तरफ से पहना जा सकता है। इसमें सीधे उल्टे की कोई पहचान नही होती है। इसका कारण है इसकी बनावट जिसे डबल इकत कहते हैं। डबल इकत में धागे की लंबाई और चौड़ाई को आपस में क्रॉस करते हुए बुनकर की जाती है। जिसकी वजह से इसके सीधे-उल्टे भाग में अंतर करना मुश्किल होता है। पाटन पटोला साड़ी का एक बड़ा खरीदार वर्ग इंडोनेशिया में भी है।
इस कपड़े की खासियत होती है कि इसका रंग कभी हल्का नहीं पड़ता, करीब सौ साल तक। पटोला साड़ियों में नर्तकी, हाथी, घोड़ा, पीपल की पत्ती, तोता, जलीय पौधे, टोकरी सज्जा की आकृतियां बनाई जाती हैं।