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बिना चेहरा दिखाए खूबसूरत दिखने का ये कैसा फैशन, ड्रेस के पीछे छिपे हैं इन लड़कियों के जज्बात

Wed, 10 Apr 2019 02:55 PM IST
मोना नारंग बीबीसी हिंदी
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- फोटो : Habiba Nowrose
बांग्लादेश में खूबसूरत दिखने के दबाव को कैमरे में कैद करने वाली 29 साल की हबीबा नवरोज कहती हैं, "महिला होने के नाते आम तौर पर खुद को खूबसूरत दिखाने का हम पर दबाव रहता है। और खूबसरती हासिल करने के क्रम में हमारा व्यक्तित्व भी छीन लिया जाता है। यहां तक कि हम खुद के लिए अनजान हो जाते हैं और हमारी पहचान गुम हो जाती है।"
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- फोटो : Habiba Nowrose
हबीबा की तस्वीरों में महिलाएं चमक और रंग से भरपूर दिखती हैं लेकिन उनका चेहरा पूरी तरह ढंका है। ये दिखाता है कि भले बाहर से बेहद खूबसूरत दिखने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की है, लेकिन उनका आत्मविश्वास खत्म हो चुका है। हबीबा इस ओर सबका ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं कि दूसरों को खुश रखने के लिए बांग्लादेशी महिलाओं को कितना कुछ समझौता करना पड़ता है।
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- फोटो : Habiba Nowrose
बीबीसी बंगाली से बात करते हुए हबीबा कहती हैं कि ये आईडिया अपने एक "बहुत कड़वे निजी अनुभव" के बाद आया। "मैं जब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुई, मैंने पाया कि लोग मुझसे बहुत अधिक उम्मीद रखने लगे थे। मुझे शादी करनी थी, मां बनना था, अच्छे वेतन वाली नौकरी पानी थी। अपने आस पास की अधिकांश लड़कियों के साथ ये होते हुए मैं देख चुकी हूं- वो अपने लिए असल में क्या चाहती हैं, उसे भूल जाने को मजबूर होना पड़ता है। "

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Habiba Nowrose
एक फोटोग्राफर के रूप में पहले साल हबीबा ने महसूस किया कि वो चाहे जितना मेहनत करें, ये काफी नहीं है, "अगर आप महिला हैं और खुद को साबित करना चाहती हैं, तो आपको मर्दों के मुकाबले दोगुनी मेहनत करनी होगी।" वो कहती हैं, "मुझे लगा कि एक इंसान के रूप में मैं खुद से दूर होती जा रही हूं। इसके बाद मैंने खुद को खुश रखने की कोशिशें शुरू कीं, यानी खुद से ईमानदार रहने की।"
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Habiba Nowrose
फोटोग्राफर के रूप में करीब 6 साल पहले हबीबा ने एक सिरीज शुरू की, 'कन्सील्ड'। वो कहती हैं, "इस एहसास को हटाने और लोगों की उम्मीदों को नकारने के एक तरीके के रूप में मैंने ये सिरीज शुरू की।" जब 2016 में हबीबा ने ढाका में अपनी तस्वीरों की एक प्रदर्शनी लगाई तो बहुत से लोगों का ध्यान गया।
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Habiba Nowrose - फोटो : Habiba Nowrose
कुल मिलाकर कला जगत में महिलाएं उनका संदेश समझ गईं, लेकिन कलादीर्घा संभालने वाले पुरुषों को अक्सर थोड़ा और समझाने की जरूरत पड़ती है। वो कहती हैं, "महिलाएं इस बात को समझ गईं, कि मैं क्या बात कर रही हूं, क्योंकि इन अनुभवों से वो होकर गुजरी हैं, लेकिन स्वाभाविक तौर पर पुरुषों के साथ ऐसा मामला नहीं है।" हबीबा कहती हैं कि 'बांग्लादेश में महिला फोटोग्राफर बहुत नहीं हैं, ये भी एक समस्या है. लेकिन चीजें अब बदल रही हैं।'
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