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प्रकाश झा ने करणी सेना के नोटिस को हवा में उड़ाया, कहा- 'दर्शक करेंगे 'आश्रम-2' का फैसला'

Fri, 06 Nov 2020 12:34 PM IST
Tanuja Yadav अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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आश्रम - फोटो : ट्विटर
भारतीय सिनेमा में हिंदूवादी चरित्रों के उत्थान और फिल्मों में भारतीय संस्कारों के उन्नयन के लिए बने राष्ट्रीय सिने सेवक संघ के मुंबई में धीमे पड़ते असर ने करणी सेना को अपना असर जमाने का मौका दे दिया है। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ का नाम बदलकर ‘पद्मावत’ कराने से शुरू हुआ ये सिलसिला अब प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ तक पहुंच रहा है।

हालांकि, प्रकाश झा ने करणी सेना के नोटिस को हवा में उड़ा दिया है और कहा कि दर्शक ही इस तरह की बातों का सही निर्णायक होता है।
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आश्रम - फोटो : Mx Player
राजपूतों की करणी सेना के वेब सीरीज 'आश्रम' को निशाना बनाए जाने पर सीरीज के निर्माता और निर्देशक प्रकाश झा ने वैसी ही प्रतिक्रिया दी है जैसी कि उनसे उम्मीद थी। प्रकाश झा करणी सेना की तरफ से मिले कानूनी नोटिस से प्रकाश बिल्कुल परेशान नहीं हैं। उनका मानना है कि इन सब मामलों को खुद दर्शकों पर ही छोड़ दिया जाए तो बेहतर होगा। वही इसका फैसला करेंगे। 
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आश्रम - फोटो : ट्विटर
प्रकाश ने करणी सेना के सामने झुकना मंजूर नहीं किया है। करणी सेना की मांग पर बिना हैरानी जताई प्रकाश झा ने अपने बयान में कहा कि करणी सेना वाले आखिर होते कौन हैं? अपने पहले सीजन की सफलता को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उनकी वेब सीरीज 'आश्रम' के पहले भाग को 40 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा है। दर्शक खुद ही फैसला करेंगे कि सीरीज में सकारात्मकता फैलाई जा रही है या फिर नकारात्मकता। इस पूरी बात को उन पर ही छोड़ देना चाहिए।

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प्रकाश झा - फोटो : Instagram
बता दें कि कुछ समय पहले प्रकाश झा की वेब सीरीज 'आश्रम चैप्टर 2- द डार्क साइड' का ट्रेलर रिलीज किया गया है। इस ट्रेलर पर ही आपत्ति जताते हुए करणी सेना ने सीरीज के निर्माताओं को एक कानूनी नोटिस भेजा। इस नोटिस में लिखा गया है कि वेब सीरीज 'आश्रम' हिंदुओं की मान्यताओं और उनके रीति-रिवाजों को ठेस पहुंचाती है।

सीरीज में दिखाई गई आश्रम की व्यवस्था आज की पीढ़ी के सामने गलत उदाहरण पेश कर रही है। करणी सेना की मांग है कि इस वेब सीरीज के दूसरे सीजन को फौरन बैन किया जाए और रिलीज किए ट्रेलर को भी वापस लिया जाए।
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आश्रम - फोटो : Mx Player
इस बारे में फिल्म जगत के लोग फिलहाल कुछ नहीं कह रहे हैं। निर्माताओं की संस्थाएं भी इस मसले पर किसी तरह की प्रतिक्रियाएं नहीं दे रही हैं। हालांकि, राष्ट्रीय सिने सेवक संघ के पदाधिकारियों का ये मानना है कि संस्था की सक्रियता कम होने से करणी सेना को बढ़ावा मिला है। संघ के पदाधिकारी ये भी मानते हैं कि महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद संघ की सक्रियता घटी है।
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