बेताल
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हिंदी सिनेमा में वीभत्स रस का ठेका बरसों तक रामसे ब्रदर्स के पास रहा है। श्रृंगार रस के रसिया शाहरुख खान ये सब क्यों बना रहे हैं, वह ही जानें। आम हिंदी दर्शक तो शाहरुख का नाम सुनते ही बहुत खराब इंसान कुछ सोच सकता है तो डर, बाजीगर या अंजाम तक जा सकता है। ये जिंदा लाशें, रामसे के लिए ही ठीक हैं। शाहरुख तो ऐसे नहीं थे। ट्रेलर गुड से एक प्वाइंट कम है लेकिन शाहरुख के डॉयलॉग के हिसाब से वेब सीरीज अभी बाकी है। अगर सीरीज ट्रेलर से बेहतर न हुई तो रेड चिलीज की ब्रांडिंग के लिए ये खतरे की घंटी साबित होगी।