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Pyre: 'पायर' के विश्व प्रीमियर में शामिल होंगे विनोद के आमा-बुबू, पहली बार फ्लाइट में बैठ भरी सपनों की उड़ान

Mon, 18 Nov 2024 04:52 PM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

विनोद कापड़ी की नई फिल्म 'पायर' का विश्व प्रीमियर तेलिन ब्लैक नाइट्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 28वें संस्करण में होने जा रहा है। अब वे आमा-बुबू के साथ तेलिन के लिए निकल चुके हैं। 
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विनोद कापड़ी के साथ 'पायर' के आमा-बुबू - फोटो : फेसबुक: Vinod Kapri
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता और निर्देशक विनोद कापड़ी की नई फिल्म 'पायर' को प्रतिष्ठित तेलिन ब्लैक नाइट्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया जाएगा। ‘पायर’ को इस फिल्म महोत्सव के 28वें संस्करण के आधिकारिक प्रतियोगिता खंड में विश्व प्रीमियर के लिए चुना गया है। इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए पद्म सिंह और हीरा देवी फिल्म के निर्देशक विनोद कापड़ी और उनकी पत्नी साक्षी जोशी के साथ एस्टोनिया की राजधानी तेलिन के लिए निकल चुके हैं।
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विनोद कापड़ी के साथ 'पायर' के आमा-बुबू - फोटो : फेसबुक: Vinod Kapri
पहली बार विदेश यात्रा पर निकले आमा-बुबू
सोमवार को निर्देशक विनोद कापड़ी ने सोशल मीडिया पर एयरपोर्ट और फ्लाइट से कुछ फोटो और वीडियो साझा किये। इन्हें साझा करते हुए उन्होंने लिखा, ‘और चल पड़े आमा बुबू (उत्तराखंड में दादी-दादा को प्यार से यही नाम दिया जाता है) एक अनोखी यात्रा पर !! विनाेद ने यह भी बताया कि आमा और बुबू दोनों की यह पहली विदेश यात्रा है। साथ ही वे अपनी जिंदगी में पहली बार उड़ान भर रहे हैं। यह पल उनकी जिंदगी में किसी कोहिनूर से कम नहीं है, बावजूद इसके फिल्म की मुख्य अभिनेत्री हीरा देवी का दिल उत्तराखंड में अपनी भैंस के पास ही अटका हुआ है।’
 
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पायर - फोटो : एक्स: @vinodkapri
‘पायर’ में दिखाई जाएगी दो बुजुर्गों की प्रेम कहानी
‘पायर’ इस साल आधिकारिक प्रतियोगिता श्रेणी में शामिल हुई एकमात्र भारतीय फिल्म है। उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ों में स्थापित 'पायर' में 80 वर्षीय गैर-पेशेवर कलाकारों पद्म सिंह और हीरा देवी मुख्य किरदारों में नजर आएंगे। दोनों फिल्म में अपनी मासूम सी प्रेम कहानी के जरिए हिमालयी क्षेत्र में जीवन का सार लोगों के सामने पेश करेंगे। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसके दोनों मुख्य कलाकार पद्म सिंह और हीरा देवी बुजुर्ग और स्थानीय हैं और दोनों ने ही कभी इससे पहले कैमरा या फिल्म नहीं देखी थी।

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पायर - फोटो : एक्स: @vinodkapri
सच्ची कहानी से प्रेरित है 'पायर'
फिल्म 'पायर' एक सच्ची कहानी से प्रेरित है, जो विनोद को 2017 में मुनस्यारी के एक गांव में मिले एक बुजुर्ग जोड़े की कहानी है। उत्तराखंड से लगातार पलायन के कारण वीरान हो चुके भूतहा गांवों की पृष्ठभूमि में यह जोड़ा मौत का इंतजार कर रहा था, लेकिन एक-दूसरे के लिए उनके प्यार ने विनोद के दिल पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि उन्होंने यह फिल्म बनाने का फैसला किया। तेलिन ब्लैक नाइट्स में अपने विश्व प्रीमियर के बाद 'पायर' अगले साल के अंत में भारत में रिलीज होने से पहले अपने फेस्टिवल रन पर होगी।
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पायर - फोटो : एक्स: @vinodkapri
भैंस के साथ अकेले रहती हैं हीरा देवी
पदम सिंह और हीरा देवी दोनों उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग तहसील के रहने वाले हैं। पदम सिंह एक सेवानिवृत्त भारतीय सेना के जवान हैं, जो अब एक किसान के रूप में काम करते हैं, जबकि हीरा देवी भैंस की देखभाल करती हैं और जंगल से लकड़ियां और घास इकट्ठा करती हैं। हीरा देवी के एक बेटे और बेटी हैं, जिसकी शादी की जिम्मेदारियों से वे मुक्त हो चुकी हैं और पति की मौत के बाद से अकेले वीराने में अपनी भैंस के साथ ही जीवन बिता रही हैं। भैंस की देखभाल करना, उनके लिए जंगलों से घास और लकड़ियां लाना ही उनकी दिनचर्या थी, फिर एक दिन विनोद की ओर से फिल्म का प्रस्ताव मिलने पर हीरा देवी हैरान रह गई और शुरुआत में उन्होंने फिल्म की अभिनेत्री बनने से इनकार कर दिया।
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पायर - फोटो : एक्स: @vinodkapri
अभिनय के लिए कैसी राजी हुईं हीरा देवी
फिल्म में काम करने से इनकार करने की कई कारण थे कि पड़ोसी क्या कहेंगे या जब वे शूटिंग पर चली जाएंगी तो उनकी भैंस की देखभाल कैसे होगी, वहीं दूसरी ओर पड़ोसियों ने उन्हें बताया कि सिनेमा के लोगों का कोई भरोसा नहीं होता, वे कुछ भी फिल्म बना लेते हैं। इन सब बातों पर गौर करते हुए हीरा देवी फिल्म में काम करने में हिचकिचाने लगीं, लेकिन विनोद दिल्ली में रह रहे उनके बेटे से मिले, जिसके बाद उन्हें फिल्म में काम करने के लिए राजी किया गया। आखिरकार तमाम उलझनों के बाद फिल्म शुरू हुई, लेकिन अब भी उनका ध्यान उनकी भैंस पर टिका था।
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विनोद कापड़ी के साथ 'पायर' के आमा-बुबू - फोटो : फेसबुक: Vinod Kapri
शूटिंग से पहले यह काम करती थीं हीरा देवी
फिल्म की शूटिंग सुबह छह बजे शुरू होती और रात आठ बजे तक चलती, जिस कारण अपनी भैंस के लिए खाने-पीने का इंतजाम हीरा देवी को उससे पहले ही करना होता था। शूटिंग सेट पर ले जाने और लाने के लिए गाड़ी का इंतजाम था, गाड़ी आने से पहले जंगल और पहाड़ों पर जाकर हीरा देवी भैंस के लिए घास और लकड़ी ले आती थीं। उन्होंने सबकी सहमति के लिए फिल्म में काम तो कर लिया, लेकिन इससे आगे उन्होंने कुछ नहीं सोचा। फिल्म जब विश्व प्रीमियर के लिए चुनी गई तब भी विनोद कापड़ी और फिल्म की टीम चाहती थी कि हीरा देवी भी तेलिन चलें, लेकिन तब भी वो अपनी भैंस की देखभाल को लेकर चिंतित थीं।

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पायर - फोटो : एक्स: @vinodkapri
हीरा देवी की चिंता हुई दूर
इन सबके बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि फिल्म की हीरोइन बनाने के बाद विनोद ने हीरा देवी को ऐसे ही नहीं जाने दिया और न ही उन्हें अनदेखा किया, बल्कि उन्हें अन्य बॉलीवुड अभिनेत्रियों की तरह पूरी इज्जत दी गई और शूटिंग सेट पर भी पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। यह सिलसिला यही नहीं रुका, विनोद भी उनके साथ तेलिन जाने के लिए उत्साहित थे। इस समारोह में हीरा देवी शामिल हो सकें, इसके लिए पहले उनकी भैंस की चिंता का समाधान किया गया। हीरा देवी की बेटी अपनी मां के घर पहुंचीं और अब उनके पास भैंस को संभालने की जिम्मेदारी है।
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पायर - फोटो : एक्स: @vinodkapri
क्या है तेलिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टविल
यूरोप के देश एस्टोनिया की राजधानी तेलिन में आयोजित होने वाले तेलिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत 1997 में की गई थी। इस साल इसके 28वें संस्करण का आयोजन 8 से 24 नवंबर तक किया जाएगा। इस फिल्म फेस्टिवल में 70 से भी अधिक देशों की 500 से भी अधिक फिल्में प्रदर्शित की जाती हैं। समारोह में इस साल भारत से फिल्म 'पायर' को फिल्म गाला कैटेगरी में प्रदर्शित किया जाएगा। यह 19 नवंबर को प्रदर्शित होगी।
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