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Vishnu Puran: दानवराज कालकेतु और इंद्र में छिड़ा भयंकर युद्ध, देवताओं के साथ लक्ष्मी नारायण की शरण में पहुंचे 'देवराज'

Wed, 27 May 2020 07:56 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
टीवी पर इन दिनों पुराने शोज की भरमार लगी है। लॉकडाउन के कारण नए कार्यक्रमों की शूटिंग नहीं हो पा रही है। इसलिए टीवी पर पुराने हिट शोज की वापसी हो रही है। इन दिनों डीडी भारती पर विष्णु पुराण का प्रसारण किया जा रहा है। विष्णु पुराण में अब तक आपने देखा कि संजीवनी मंत्र पाने के लिए देवराज इंद्र और दैत्य गुरु शुक्राचार्य का आमना सामना होता है। इस बीच इंद्र की बेटी जयंती शुक्राचार्य से छल करती है। जिसके बाद भगवान शिव, शुक्राचार्य को संजीवनी मंत्र प्रदान करते हैं।
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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
अपराध बोध से त्रस्त जयंती, शुक्राचार्य से शादी करने का प्रस्ताव रखती हैं। शुक्राचार्य उनके शादी के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं। आज के एपिसोड में आपने देखा शुक्राचार्य ने संजीवनी मंत्र जन कल्याण के लिए मांगा था लेकिन उन्होंने इसका उपयोग दैत्यों के हित के लिए किया। इस बीच कालकेतु सत्ता के मद में चूर होकर देवलोक पर आक्रमण करने की घोषणा कर देता है। जब ये खबर इंद्र को लगती है तो दैत्यों और देवों की सेना के बीच युद्ध छिड़ जाता है। इधर जयंती अपने पति गुरु शुक्राचार्य के विजय की प्रार्थना करती हैं।
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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया

युद्ध में शुक्राचार्य अपने मृत सैनिकों को संजीवनी मंत्र से जिंदा कर देते हैं, यह देखकर इंद्र कालकेतु पर वार करते हैं। इस भयंकर युद्ध में दानवराज कालकेतु मारा जाता है लेकिन शुक्राचार्य संजीवनी मंत्र से उसे दोबारा जीवित कर देते हैं।

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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया

दोनों के बीच घमासान युद्ध होता है लेकिन दानवराज कालकेतु की सेना इंद्र की सेना पर भारी पड़ती है और देवराज इंद्र को युद्ध में पीठ दिखाकर भाग जाना पड़ता है। इंद्र को अहसास होता है कि अंहकार की वजह से उन्हें ऐसा परिणाम देखने को मिला है। इंद्र अपने साथियों के साथ लक्ष्मी नारायण की शरण में अपनी समस्या का समाधान जानने के लिए जाते हैं।

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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
भगवान विष्णु इंद्र को संजीवनी मंत्र का उपाय बताते हैंं, वह कहते हैं- अमृत पाकर ही दानवों को पराजित किया जा सकता है। अमृत पाने के लिए भगवान विष्णु, देवराज इंद्र को देवताओं और दानवों के दलों के साथ समुद्र मंथन की सलाह देते हैं। मंदार पर्वत, वासुदेव नाग की सहायता से इस तरह शुरू होती है समुद्र मंथन की प्रक्रिया। इसी मंथन से हलाहल विष के साथ 14 रत्न निकले थे।

ये भी पढ़ें- Vishnu Puran: आखिर क्यों इंद्र की पुत्री जयंती ने किया दैत्यगुरु शुक्राचार्य से विवाह, भगवान शिव ने किसे दिया था 'संजीवनी मंत्र'?
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