Shrenu Parikh
श्रेणु ने आगे लिखा कि ' मेरी समझ से यह बिल्कुल बाहर था कि उस दौरान मेरे साथ क्या हो रहा था, वो आदमी मुझे बार-बार गलत तरीके से छू रहा था और इस बात का मुझे भी अंदाजा होता जा रहा था कि कुछ तो गलत है, लेकिन मैं कुछ कह नहीं सकी, क्योंकि उस वक्त में सही और गलत को समझने के लिए परिपक्व नहीं थी, वहीं, नाना दूर खड़े हुए थे जिनपर मेरी नजर बराबर जा रही थी लेकिन मैं नाना को इसके बारे में एक बार भी बताने की कोशिश नहीं कर पा रही थी।