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दरअसल, 'मेरे दादा जी के समय से ही घर में अध्यात्म की तरफ सबका रुझान ज्यादा रहा है, हम महाकाली, अंधेरी ईस्ट में रहा करते थे, उस दौरान मुझे रोज रात 12 से 1 खिड़की पर बैठने की लत थी, तब मुझे आत्मा दिखती थी और कुछ अजीब-अजबी आवाजें भी सुनाई देती थीं, ऐसे ही एक दिन मुझे किसी मर्डर के बारे में सपना आया,