देश भले चांद तारों से आगे जाने की बातें कर रहा हो, लेकिन भारतीय मनोरंजन के मामले में टेलीविजन की सोच अब भी पुरानी परिपाटियों, दस्तूरों और रूढ़ियों पर ही अटकी है। कभी चुड़ैल, कभी नागिन तो कभी कुछ और दिखाने के बहाने टीआरपी बटोरने की इन कोशिशों ने अब उन कानाफूसियों पर भी काम शुरू कर दिया है जिनकी चर्चाएं अब तक गली मोहल्लों की चाचियां और ताइयां ही करती रही हैं। और, इसी तरह की एक अजीब सी कहानी सैटेलाइट चैनल जी टीवी पर अगले हफ्ते से शुरू होने जा रही है।