रामायण देखते सुनील लहरी
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सुनील लहरी ने बताया- 'जब मेरी आंख खुली तो मैं अपनी गाड़ी के साथ एक खेत में था और दूर मुझे हाईवे नजर आ रहा था। भगवान की कृपा और बड़ों का आशीर्वाद ही था कि न तो मुझे कोई खरोंच आई और न ही मेरी गाड़ी को कुछ हुआ। फिर मैं गाड़ी को लेकर हाईवे पर आया और नजदीक के एक रेस्टोरेंट में जाकर मुंह हाथ धोया और फिर बॉम्बे के लिए निकला।'