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'जंगल जंगल बात चली है' से लेकर 'अलिफ लैला' तक, दूरदर्शन के धारावाहिकों के टाइटल ट्रैक आज भी हैं पसंदीदा

Sun, 27 Sep 2020 06:35 AM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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दूरदर्शन के कार्यक्रम - फोटो : फाइल फोटो
दूरदर्शन ने अपने दर्शकों को शुरुआत से ही कई बेहतरीन धारावाहिकों की सौगात दी है। ये सभी धारावाहिक दर्शकों को दूरदर्शन के साथ बांधे रखने के लिए कारगर साबित हुए। इन धारावाहिकों के टाइटल ट्रैक से भी दर्शकों को हमेशा बेहद लगाव रहा है। केवल उस समय ही नहीं बल्कि आज के समय में भी दूरदर्शन के सभी धारावाहिकों के टाइटल ट्रैक को काफी पसंद किया जाता है। इस पैकेज में हम आपको ऐसे ही धारावाहिकों के टाइटल ट्रैक्स सुनाएंगे जिनके नाम के साथ ही आपका नॉस्टेल्जिया जाग जाएगा...
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मालगुडी डेज
'मालगुडी डेज'... इस धारावाहिक का नाम लेते ही इसकी मधुर बांसुरी की धुन अपने आप ही कानों में गूंजने लगती है। गिरीश कर्नाड के निर्देशन में बना मालगुडी डेज अपने टाइटल ट्रैक के लिए काफी प्रचलित था। इस धारावाहिक के टाइटल ट्रैक में एक मधुर बांसुरी की धुन थी। साथ में आर के लक्ष्मण के इल्युस्ट्रेशन ने इस टाइटल ट्रैक की खूबसूरती और भी बढ़ा दी थी।
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एक से बढ़कर एक
दूरदर्शन पर 90 के दशक में 'पेप्सी एक से बढ़कर एक' आया करता था। जिसमें 10 पॉपुलर गाने दर्शकों के उस समय के दिखाए जाते थे। लेकिन ये धारावहिक अपने टाइटल ट्रैक के लिए भी खूब पसंद किया जाता था।

पोटली बाबा की कहानी
गुलजार के निर्देशन में सीरियल 'पोटली बाबा की कहानी' का प्रसारण साल 1991 में हुआ था। सीरियल का टाइटल ट्रैक 'आया रे बाबा' को गुलजार ने लिखा था। बच्चों के बीच ये गाना काफी मशहूर हुआ था। बच्चों के इस सीरियल में 'अली बाबा चालीस चोर' जैसी कई कहानियां दिखाई गईं थीं।
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चंद्रकांता
1994- 96 में नीरजा गुलेरी सीरियल 'चंद्रकांता' लेकर आईं। सीरियल में शिखा स्वरूप, शाहबाज खान, मुकेश खन्ना, इरफान खान और पंकज धीर जैसे कलाकार थे। 'चंद्रकांता' सीरियल बाबू देवकीनंदन खत्री के इसी नाम के उपन्यास पर बना था। सीरियल में नौगढ़ और विजयगढ़ की कहानी दिखाई गई थी। इस धारावाहिक का टाइटल ट्रैक 'चंद्रकांता की कहानी' दर्शकों के बीच काफी मशहूर था जिसे सोनू निगम ने गाया था।
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ये जो है जिंदगी
शरद जोशी के द्वारा लिखा गया ये धारावाहिक 'ये जो है जिंदगी' का निर्देशन कुंदन शाह ने किया था। इस धारावाहिक का टाइटल ट्रैक काफी मशहूर था। इस गाने को लेजेंड्री गायक किशोर कुमार ने गाया था। 1984 में आए इस धारावाहिक में स्वरूप पसंद, राकेश बेदी, सतीश शाह, टीकू तलसानिया मुख्य भूमिका में थे।
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अलिफ लैला
'अलिफ लैला' का प्रसारण साल 1993 से 1997 के बीच किया गया। अरेबियन नाइट्स पर आधारित 'अलिफ लैला' का स्क्रीनप्ले रामानंद सागर ने लिखा था। इसका निर्देशन उनके तीन बेटों प्रेम सागर, आनंद सागर और मोती सागर ने किया था। इस धारावाहिक का टाइटल ट्रैक भी अरबी म्यूजिक से इंस्पायर था। जिसे कृष्णा एम गुप्ता ने कंपोज किया था।

द जंगल बुक
'द जंगल बुक' का टाइटल सॉन्ग 'जंगल जंगल बात चली है पता चला है', आज तक बच्चों के बीच बेहद पसंद किया जाता है। इसे गुलजार ने लिखा था और अमोल सहदेव द्वारा गाया गया था। इस गाने को विशाल भारद्वाज ने कंपोज किया था। इसे आज भी बच्चे से लेकर बड़े तक सभी गुनगुनाते हैं

जबान संभाल के
कॉमेडी शो 'जबान संभाल के' का टाइटल सॉन्ग भी उस समय में काफी मशहूर था। ये धारावाहिक एक ब्रिटिश शो का हिंदी रीमेक था। धारावाहिक में पंकज कपूर मुख्य भूमिका में थे। जो हिंदी के अध्यापक रहते हैं और उनके पास दुनिया के अलग-अलग कोनों से छात्र पढ़ने आते हैं।

देख भाई देख
आइकॉनिक कॉमिक शो देख भाई देख के टाइटल ट्रैक के लिरिक्स 'इस रंग बदलती दुनिया में क्या तेरा है क्या मेरा है' को दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया। इस गाने को अमित खन्ना ने लिखा था और अजीत सिंह ने कंपोज किया था। सीरियल में दीवान फैमिली की तीन पीढ़ियों के बीच खूबसूरत बॉन्डिंग दिखाई गई थी। जीवन में आने वाले उतार-चढ़ा, रिश्तों में होने वाली तकरार और पारिवारिक दिक्कतों को यह शो बड़े चुटीले अंदाज में दिखाता था।
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महाभारत
लॉकडाउन के दौरान 'महाभारत' के टाइटल ट्रैक 'अथ श्री महाभारत कथा' को दोबारा से दर्शकों का प्यार मिला। बीआर चोपड़ा की महाभारत में टाइटल ट्रैक को महेंद्र कपूर ने गाया था। इसे आज भी बेहद पसंद किया जाता है।

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