महाभारत
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भीष्म पितामह मरते वक्त पांडवों से कहते हैं, 'देश की सीमा माता के वस्त्र की भांति पूजनीय होती है। उसकी सदैव रक्षा करना। यदि विभाजन की मांग होती है तो कुरुक्षेत्र में आ जाओ पुत्र, पर देश का विभाजन कभी मत होने दो। क्या तुम माता कुंती को काट कर आपस में बांट सकते हो। अगर नहीं तो फिर देश का विभाजन कैसे कर सकते हो।'