Pt. Narendra Sharma
- फोटो : Lavanya Shah
इसके बाद बी आर फिल्म्स के दफ्तर में रोज बैठकें होने लगीं। एक तरफ बी आर चोपड़ा और उनके बेटे रवि होते, दूसरी तरफ इसकी पटकथा लिखने को तैयार हुए राही मासूम रजा। बीच में पापाजी कमरे में टहलते रहते और एक एक एपिसोड पर विचार चलता रहता। लावण्या भी इस बैठक में अक्सर शामिल होतीं। वह बताती हैं, “कभी कभी पापाजी कथा में इतना डूब जाते कि उठ कर खड़े हो जाते और टहलते हुए कथानक को इतने विस्तार से बतलाते कि सबको यूं लगता कि वे उसी कालखंड में जाकर खड़े हो गए हैं। पापाजी की कही कोई बात व्यर्थ न जाए, इसके चलते जैसे ही उनका बोलना आरम्भ होता, टेप रिकॉर्डर ऑन कर लिया जाता ताकि बाद में सब आराम से सुना जा सके।”