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निजी जिंदगी के बारे में रूमा बताती हैं कि 'शादी के डेढ़ साल बाद मेरा एक बेटा हुआ। जब उसकी तबीयत खराब हुई तो मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि उसे किसी अच्छे अस्पताल में इलाज कराती। 48 घंटे ही वो जिंदा रह सका, मैं उसे बचा नहीं सकी। पैसों की कमी की वजह से मैं उसे बड़े अस्पताल नहीं ले जा सकी। इस घटना ने मेरी जिंदगी बदल दी और मैंने सोचा कि मेरी तरह कितनी महिलाएं होंगी जो घुट-घटकर जी रही हैं। फिर मैंने ठान लिया कि दूसरों की जिंदगी बदल दूंगी।'