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बिग बॉस 12: क्या दीपिका कक्कड़ ने फिक्सिंग से जीती ट्रॉफी, जवाब में बोलीं- 'कुछ लोग होते हैं जो...'

Thu, 03 Jan 2019 09:48 AM IST
यशवीर सिंह मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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dipika kakar - फोटो : twitter
ससुराल सिमर का से टीवी स्टार बनीं दीपिका कक्कड़ का बिग बॉस का 12वां सीजन जीतना टेलीविजन इंडस्ट्री की बड़ी कंट्रोवर्सी बन गया है। घर वालों से दूर सौ से भी ज्यादा दिन बिताने, शो को जीतने और फिक्सिंग के लगे आरोपों के बारे में अमर उजाला ने की दीपिका से ये खास मुलाकात।

जब सलमान खान ने आपको विजेता घोषित किया तो आपके चेहरे पर खुशी से ज्यादा हैरानी के भाव थे, ऐसा क्यों?

सलमान सर मजाक करते रहते हैं। तो मेरा नाम उन्होंने पुकारा तो मुझे लगा कि ये फिर मजाक ही कर रहे हैं। सच बोलूं तो मुझे अब तक यकीन नहीं हुआ है क्योंकि ये सफर बहुत ज़्यादा कठिन रहा है। घर आने के बाद यकीन होना शुरू हुआ है कि मैं बिग बॉस जीत गई हूं।
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dipika kakar - फोटो : file photo
घर वालों से दूर सौ दिन? कैसे कटे?

पूरे 105 दिन। इस दौरान मुझ पर बहुत सारे आरोप लगे। हर काम पर उंगली उठी तो इस सबका सामना करते हुए खुद को जैसी मैं हूं वैसी ही बनाए रखना अपने आप में ही एक बहुत बड़ी चुनौती थी। मेरा ये 105 दिन का वक्त जिंदगी भर मुझे नहीं भूलेगा।
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बिग बॉस - फोटो : file photo
आपने श्रीसंथ को अपना बड़ा भाई बना लिया। इस सफर में और कितने दोस्त बने?

मैंने एक बहुत ही खास रिश्ता श्रीसंथ भाई के साथ बनाया है और मैं चाहूंगी कि ये आगे भी बरकरार रहे। बिग बॉस के घर का माहौल अच्छे अच्छे को हिला देता है। जब मैं कमज़ोर पड़ रही थी, वह मुझे संभाल रहे थे। बाकी सबके साथ भी अच्छा तालमेल बना लेकिन भाई जैसा रिश्ता दूसरा कोई नहीं।
 

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bigg boss - फोटो : twitter
अगर आपकी जगह श्रीसंथ जी जीत जाते तो आपको कैसा लगता? 

मैं उनके लिए दिल से बहुत खुश होती क्योंकि उसी वक्त मुझे सबसे ज़्यादा खुशी मिल गई थी, जब टॉप टू में हम दोनों थे। बिग बॉस आपका असली रूप सामने ला देता है। मैं और श्रीसंथ भाई ने हमेशा अपना असली चेहरा ही दर्शकों को दिखाया। 
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bigg boss - फोटो : file photo
लेकिन आरोप लग रहे हैं कि दीपिका फिक्सिंग से जीती है।

जब आप जिंदगी में कुछ हासिल करते हैं तो कुछ लोग होते हैं जो आपको साथ देते हैं और कुछ लोग होते हैं जो नहीं देते हैं। अब ये उनकी सोच है। आखिर में ये लड़ाई मेरे लिए सिर्फ बिग बॉस जीतना नहीं था। मुझे साबित करना था कि मैं जिस तरह से आचरण कर रही हूं वही सच है। ये सच की जीत है।

 
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