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Christmas 2021: सितारों ने खोले बचपन के अपने अपने सैंटा के राज, पढ़ेंगे तो आप भी सैंटा बनने के लिए मचल जाएंगे

Sat, 25 Dec 2021 09:24 AM IST
कविता गोसाईंवाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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टीवी सेलेब्स - फोटो : सोशल मीडिया
जिंगल जिंगल बेल, जिंगल ऑल दे वे...सुनते ही साल के इस आखिरी हफ्ते में बच्चे खुशी शे झूम उठते हैं। बीते साल कोरोना के चलते घरों में कैद रहे बच्चे और उनके सांता इस बार क्रिसमस का त्योहार अच्छे से मनाते दिख रहे हैं। त्योहार के लिए जरूरी सावधानियों के साथ बच्चों और सैंटा का ये संगम हर तरफ खुशियां बरसा रहा है। क्रिसमस के इस मौसम में एण्डटीवी के कलाकारों मौली गांगुली, अंकित बाथला, अकांशा शर्मा, कामना पाठक और शुभांगी अत्रे ने अपनी उन सीक्रेट विशेज के बारे में बताया जो उन्होंने अपने बचपन में सैंटा क्लाज से मांगी थीं।
 
मौली गांगुली
धारावाहिक ‘बाल शिव‘ की महासती अनुसुइया

‘‘बचपन में मुझे लगता था कि सैंटा सभी लोगों के क्रिसमस ट्री देखने आते हैं और जिसकी सजावट सबसे अच्छी होती है, उन्हें वो चाकलेट एवं तोहफे देंगे। मेरी उनसे कोई खास विश तो नहीं होती थी लेकिन मैं अपने क्रिसमस ट्री को अच्छे से सजाने और उसे खूबसूरत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी। मुझे कई सालों तक कुछ भी नहीं मिला और मुझे लगता था कि मेरा क्रिसमस ट्री अच्छे से नहीं सज पाया होगा इसलिये सैंटा ने मुझे कोई भी तोहफा नहीं दिया। लेकिन एक दिन क्रिसमस की सुबह मैंने क्रिसमस ट्री के नीचे एक बहुत ही सुंदर फ्राक देखी और मैं बहुत खुश हुई। बाद में मुझे पता चला कि वह फ्राक सैंटा क्लाज नहीं, बल्कि मेरी दादी उस दिन स्कूल में मेरे पहनने के लिये लेकर आईं थीं। वही मेरा असली सैंटा बन गईं।”
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अंकित बाथला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अंकित बाथला
धारावाहिक ‘घर एक मंदिर-कृपा अग्रसेन महाराज की‘ के सिद्धांत सिन्हा

 
‘‘क्रिसमस मेरे पसंदीदा त्योहारों में से एक है। मैं इस फेस्टिवल का बेसब्री से इंतजार करता हूं और सजावट के सारे सामानों को पहले से ही तैयार रखता हूं। मुझे मीठा हमेशा से ही पसंद रहा है और बचपन में मैं चाकलेट का दीवाना था। मेरे लिए क्रिसमस का मतलब है दिल खोलकर चाकलेट खाने का दिन। मैं अपने घर के चारों ओर इस उम्मीद में छोटे-छोटे मोजे लटकाता था कि सैंटा आयेंगे और उन्हें चाकलेट एवं कैंडीज से भर देंगे। अगले दिन मेरी यह इच्छा पूरी हो जाती थी और सालों तक यह सिलसिला यूं ही चलता रहा। लेकिन जब मैं बड़ा हुआ, तो मुझे पता चला कि सैंटा क्लाज नहीं बल्कि मेरी मां उन मोजों में चाकलेट और कैंडीज भरती थीं। मेरी कामना है कि क्रिसमस पर आप सभी को ऐसे ही प्यारे सरप्राइजेज मिलते रहे।”
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अकांशा शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अकांशा शर्मा
धारावाहिक ‘और भई क्या चल रहा है? की सकीना मिर्जा


‘‘बचपन में मुझे गुड़ियों और साफ्ट ट्वायज से बहुत प्यार था। और हर साल मैं बहुत बेसब्री के साथ क्रिसमस का इंतजार करती थी ताकि मुझे कोई नई गुड़िया या साफ्ट ट्वाय मिले। मैं अपने दोस्तों और परिवार वालों को उस गुड़िया के बारे में बताती थी, जिसे मैं क्रिसमस पर उपहार के रूप में देने के लिये हर रात सैंटा से कहा करती थी। क्रिसमस की सुबह मुझे मेरे मम्मी पापा से ढेर सारी गुड़िया मिलती थी और वे मुझसे कहा करते थे कि सांता क्लाज वह सब मेरे लिये देकर गए हैं। क्रिसमस पर गुड़ियों और साफ्ट ट्वायज मिलने का यह सिलसिला कई सालों तक जारी रहा। और, ये सब मेरे पैरेंट्स सैंटा के नाम पर करते रहे।”

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कामना पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कामना पाठक
धारावाहिक ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की राजेश


‘‘टीनेज के दिनों में मुझे हेयर एसेसरीज जैसे कि क्लिप्स, बैंड्स, हेयर बोज आदि का बहुत शौक था। मुझे याद है कि एक बार क्रिसमस पर मैं इस त्योहार से एक दिन पहले बात कर रही थी मुझे अपने बालों को अलग-अलग तरह से खूबसूरती से सजाने के लिये कुछ कलरफुल बीड क्लिप्स की कितनी ज्यादा जरूरत है। अगले दिन मुझे एक बॉक्स मिला, जो उन बीड क्लिप्स और तरह-तरह के क्लिप्स एवं बैंड्स से भरा था। उस साल मेरी सीक्रेट सांता कोई और नहीं बल्कि मेरी बहन थी। वह तोहफा पाकर मैं बहुत खुश हुई और मुझे उससे भी ज्यादा खुशी इस बात की थी, कि मेरी बहन ने इतनी खूबसूरती से मेरी इच्छा को पूरा किया।”
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शुभांगी अत्रे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शुभांगी अत्रे
धारावाहिक ‘भाबीजी घर पर है‘ की अंगूरी भाबी


‘‘स्कूल के दिनों में मेरी एक क्लासमेट ने मुझे बताया था कि कैसे सांता क्लाज उसके घर पर आए और क्रिसमस ट्री के नीचे एक बैडमिंटन रैकेट लटका कर चले गए। उस समय मैं बहुत छोटी थी और मुझे लगा कि यह कहानी सच्ची है। हालांकि, क्रिसमस सेलीब्रेशन खत्म हो चुका था लेकिन फिर भी मैंने सांता से विश मांगने की सोची क्योंकि मुझे डांस करना और गाना पसंद था और इसलिये मुझे एक टेप रिकार्डर चाहिये था। मैंने कागज पर एक क्रिसमस ट्री बनाकर काटा एवं उसे हरे रंग से रंग दिया और उस पर टेप रिकार्डर लिख दिया। मुझे उम्मीद थी कि अगले दिन सांता क्लाज मुझे वह उपहार जरूर देंगे। और अगले दिन ऐसा हुआ भी और मेरे सैंटा कोई और नहीं बल्कि मेरे पिता थे। मेरे पिता मेरे सैंटा थे और इस विरासत को आगे बढ़ाते हुये मैं हर साल अपनी बेटियों की सांता बनती हूं और उनकी विशेज पूरी करती हूं।”
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