फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

B R Chopra Exclusive: ‘महाभारत’ के पहले बैच में तलाशिए ‘युधिष्ठिर’ को, ‘अमर उजाला’ को सुनाई ऑडीशन की कहानी

Sat, 05 Nov 2022 08:39 AM IST
शशि सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
1 of 5
बी आर चोपड़ा की ‘महाभारत’ के लिए चुने गए पहले बैच के कलाकारों की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

दूरदर्शन पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘महाभारत’ के बारे में अब तक न जाने कितनी बार कितना कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन जब बी आर चोपड़ा के जीवन से जुड़ा कोई दिन करीब आता है, उनकी तमाम सुपरहिट फिल्मों पर उनके इस धारावाहिक की यादें ही भारी पड़ जाती हैं। 94 साल की उम्र में 5 नवंबर 1998 को ये दुनिया छोड़ जाने वाले बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा को भारत सरकार ने सिनेमा के सबसे बड़े राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया, उनकी निर्देशित ‘नया दौर’, ‘कानून’, ‘हमराज’, ‘पति पत्नी और वो’, ‘इंसाफ का तराजू’, ‘निकाह’ और ‘तवायफ’ जैसी फिल्में हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर मानी जाती हैं। लेकिन, कभी मुंबई फिल्म जगत का मील का पत्थर रहा उनका प्रतिष्ठित बंगला उनकी पुश्तैनी विरासत संभालने वाले कानूनी विवादों में फंसने के चलते संभाल नहीं पाए। ‘अमर उजाला’ से एक खास मुलाकात में धारावाहिक ‘महाभारत’ में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान कहते हैं, ‘जिस तरह से उनकी विरासत बिखर रही है उसे देखकर मुझे बहुत दुख होता है। मेरे लिए तो वह दूसरे घर जैसे था। मैं हमेशा चोपड़ा साहब के घर पर जाता रहता था और हमारी फिल्मों पर बहुत बात होती थी।'’

विज्ञापन

2 of 5
बी आर चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

शूटिंग से पहले 10 साल तक पटकथा पर काम
बी आर चोपड़ा की 'महाभारत'  के बाद न जाने कितने लोगों ने महाभारत बनाई लेकिन जितनी लोकप्रियता  बी आर चोपड़ा की 'महाभारत' को मिली उतनी लोकप्रियता किसी को नहीं मिली। गजेन्द्र चौहान कहते हैं, 'हिमालय से ऊंचा कुछ नहीं, ताज से बड़ा कुछ नहीं, लता मंगेशकर से बड़ा कोई नहीं। इसी तरह बी आर चोपड़ा की 'महाभारत' जैसा कोई नहीं। इसके बाद जितनी भी 'महाभारत' बनी हैं, उनमें आत्मा नहीं है। चोपड़ा साहब स्क्रिप्ट पर बहुत काम किया करते थे। ‘महाभारत’ की स्क्रिप्ट पर उन्होंने करीब 10 साल तक काम किया। 'महाभारत' 1988 में शुरू हुआ और वह इसकी स्क्रिप्ट पर 1979 से काम कर रहे थे। चोपड़ा साहब का  मानना था कि सिनेमा सिर्फ देखने की चीज नहीं बल्कि सीखने की चीज है, इसमें बहुत सारे संदेश होते हैं।'

विज्ञापन

3 of 5
बी आर चोपड़ा व अन्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

मेरा नाम पहले नंबर पर रहा: गजेंद्र

गजेंद्र बताते हैं, 'महाभारत' के कलाकारों के चयन में चार साल का समय लगा। साल 1984 में इसका पहला विज्ञापन साप्ताहिक फिल्म समाचार पत्र ‘स्क्रीन’ में प्रकाशित हुआ। लाखों लोगों ने आवेदन भेजा था जिनमें से पहले दौर में आठ हजार लोग चयनित हुए। इसके बाद कई दौर की चयन प्रक्रिया के बाद पहले 3500 लोग बचे फिर ये संख्या 1500 तक पहुंची और इसमें अंतत: 12 लोग चयनित हुए जिनमें मेरा नाम पहले नंबर पर था। मेरा चुनाव पहले कृष्ण के किरदार के लिए हुआ था। ये बात भी कम लोग ही जानते हैं कि 'महाभारत' का प्रसारण पहले 'रामायण' से पहले होने वाला था। रामानंद सागर के धारावाहिक ‘रामायण’ का पहला एपिसोड 24 जनवरी 1987 को प्रसारित हुआ, उसके काफी पहले 7 जुलाई 1986 को 'महाभारत' का मुहूर्त हो चुका था और धारावाहिक का पायलट एपिसोड कहें या कि पहला एपिसोड शूट हो चुका था। इसमें राज बब्बर ने अभिनय किया था।' 

4 of 5
बी आर चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

चाय बनाने वाले मनोहर के सुझाव का भी स्वागत
‘महाभारत’ से जुड़े हर कलाकार के पास इस धारावाहिक की मेकिंग से जुड़ी बहुत सारी यादें हैं। गजेंद्र चौहान बताते हैं, ‘बी आर चोपडा साहब हर किसी का सुझाव मानते थे चाहे वह उनका चाय बनाने वाला नौकर मनोहर ही क्यों ना हो? चोपड़ा साहब किसी के भी सुझाव को अनदेखा नहीं करते थे। एक बार का हुआ यूं कि जुए वाले सीन की शूटिंग हो गई थी तो मैंने चोपड़ा साहब को सुझाव दिया कि इसमें जुए में हारने के बाद मां की प्रतिक्रिया भी शामिल की जानी चाहिए। चोपड़ा साहब ने तुरंत धारावाहिक की लेखन टीम को इस काम पर लगा दिया। डॉ. राही मासूम रजा ने लंबे मंथन के बाद ये सीन लिखा जिसमें कुंती पांचों बेटों को ले जाकर धृतराष्ट्र के सामने खड़ा कर देती है।’

विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बी आर चोपड़ा का बंगला - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

183 करोड़ रुपये में बिका बी आर चोपड़ा का बंगला

एक दौर था जब मुंबई में आने वाले लोग अमिताभ बच्चन का बंगला देखने के साथ ही बी आर चोपड़ा का बंगला भी देखने आया करते थे। लेकिन बी आर फिल्म्स की फिल्म ‘बंदा ये बिंदास है’ को अपनी फिल्म ‘माई कजिन विनी’ की गैर कानूनी रीमेक बताने के बाद हॉलीवुड स्टूडियो ट्वेंटिएथ सेंचुरी फॉक्स ने जो मुकदमा दायर किया था, उसे निपटाने में बी आर फिल्म्स के वारिस रवि चोपड़ा की आर्थिक स्थिति डोल गई। लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक बोझ को देखते हुए रवि की पत्नी रेनू ने ये बंगला इसी साल 183 करोड़ रुपये में बेच दिया। गजेंद्र कहते हैं, ‘चोपड़ा साहब इंडस्ट्री के बहुत बड़े पिलर थे लेकिन आज जिस तरह से उनकी विरासत बिखर रही है उसे देखकर मुझे बहुत दुख होता है। मेरे लिए तो वह दूसरा घर जैसे था। मैं हमेशा चोपड़ा साहब के घर पर जाता रहता था और हमारी फिल्मों पर बहुत बात होती थी।'

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें