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Taarak Mehta: निधन के बाद नहीं हुआ था तारक मेहता का अंतिम संस्कार, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

Wed, 01 Mar 2023 11:11 AM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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तारक मेहता - फोटो : अमर उजाला

टेलीविजन जगत का मशहूर शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की लोकप्रियता आज इतनी बढ़ गई है कि घर-घर में इस शो को देखा जाता है। यही नहीं, यह शो आज के समय में दर्शकों के पसंदीदा शोज में से एक बन गया है, लेकिन क्या आपको पता है कि यह शो भारत के मशहूर हास्य लेखक और नाटककार तारक मेहता की देन है। यह शो तारक मेहता की रचना 'दुनिया ने उंधा चश्मा' से प्रेरित होकर बनाया गया है। आज ही के दिन तारक मेहता की 87 साल की उम्र में मौत हो गई थी। तारक मेहता को पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। 

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तारक मेहता - फोटो : social media

तारक मेहता का नाम आज बच्चे-बच्चे की जुबान पर है, जिसका कारण तारक  'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' शो है, लेकिन आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो असली तारक मेहता से वाकिफ नहीं है। तारक मेहता द्वारा लिखी गई रचना 'दुनिया ने उंधा चश्मा' गुजराती भाषा में लिखी गई थी। इस रचना को आधार बनाकर  'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' नाम का एक टीवी शो शुरू किया गया, जो आज लोगों की खूब वाहवाही लूट रहा है।

 
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तारक मेहता - फोटो : social media

तारक मेहता की मौत लंबी बीमारी के बाद अहमदाबाद में हुई थी। उनकी मौत से न सिर्फ गुजरात में उनके चाहने वाले दुखी हुए थे, बल्कि पूरे देश में लोगों को उनकी मौत का बेहद अफसोस है। उनका योगदान अतुलनीय है। आज भी जब शो के निर्माता असित मोदी तारक मेहता शो की चर्चा करते है तो उनका नाम जरूर लेते हैं,क्योंकि अगर उन्होंने यह रचना नहीं की होती तो आज यह शो दर्शकों के बीच इतना लोकप्रिय नहीं होता।
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तारक मेहता - फोटो : social media

तारक मेहता ने 80 से ज्यादा किताबें लिखी थीं। उनकी रचनाओं का कोई जोड़ नहीं था। पाठक वर्ग उनकी रचनाओं को पढ़ना काफी पसंद करता है, क्योंकि उनके लिखने की शैली बाकि सभी लेखकों से बिल्कुल अलग थी। उनकी नॉवेल 'दुनिया ने उंधा चश्मा' लोगों के बीच ज्यादा पॉपुलर हुआ।

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तारक मेहता - फोटो : social media

बता दें कि तारक मेहता के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया, बल्कि उनका देह-दान किया गया था। परिवार के मुताबिक यही उनकी आखिरी इच्छा थी। वह हमेशा यह बात दोहराते थे कि जब उनका देहांत हो तो वह देह-दान कर सकें और समाज कल्याण में अपनी सहभागिता दर्ज करवा सकें। आज उनके न रहने के बाद भी देश उन्हें याद करता रहेगा।
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