क्योंकि सास भी कभी बहू थी
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'बा' के किरदार ने उन्हें फिर से जीवनदान दे दिया
‘बा’ के किरदार ने सुधा शिवपुरी को क्या दिया, इस अनुभव को साझा करते हुए रितु ने बताया कि मां ने अपने करियर का सबसे सुनहरा दौर हमारे लिए छोड़ दिया था। कई बार पर्दे के पीछे रहकर उन्होंने सिर्फ एक मां होना चुना। लेकिन जब उन्हें 'बा' का किरदार मिला, तो जैसे किसी ने उन्हें फिर से जीवनदान दे दिया। वो बहुत खुश थीं। वो कहती थीं कि अब मैं फिर से सांस ले रही हूं। उनकी आंखों में चमक लौट आई थी। ऐसा लगता था जैसे बरसों बाद किसी कलाकार को उसकी रूह से जुड़ा किरदार मिल गया हो। वो कैमरे के सामने लौट तो रहीं थीं, लेकिन इस बार वो सिर्फ सुधा शिवपुरी नहीं थीं। वो हर घर की ‘बा’ बनने चली थीं।
'बा' सिर्फ किरदार नहीं, एक एहसास थीं
रितु बताती हैं कि 'बा’ सिर्फ एक किरदार नहीं थीं। वो हर घर की दादी बन गई थीं। लोग उन्हें देखकर रुक जाते थे, उनके पैर छूते थे। बस एक बार ‘बा’ कहना चाहते थे।
शो लौट रहा है, पर मां की जगह कोई नहीं ले सकता
जब शो की वापसी की बात हुई तो रितु के दिल में एक खामोशी सी गूंजने लगी। वो कहती हैं कि आज जब शो फिर से आ रहा है, तो दिल में एक खालीपन है। बा सिर्फ एक किरदार नहीं थीं। वो एक एहसास थीं, जो हर रिश्ते में, हर सीन में और हर मुस्कान में झलकता था। उनकी आंखों में जो ममता थी, वो किसी स्क्रिप्ट से नहीं आती थी, वो उनके भीतर से निकलती थी। आज शो लौट रहा है, कहानियां फिर से जीवित हो रही हैं, पर मां की वो जगह हमेशा खाली रहेगी। क्योंकि मां की जगह कोई नहीं ले सकता।