चिन्नी जयंत तमिल सिनेमा का एक जाना पहचाना नाम हैं। वह साउथ सिनेमा के 80 के दशक के मशहूर सितारों में से एक हैं, जो रजनीकांत की फिल्मों में अपनी कॉमेडी के लिए पहचाने जाते हैं। लेकिन उनके बेटे श्रुतंजय कृष्ण मूर्ति नारायणन ने अपना लक्ष्य भारत की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को बनाया था। अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए श्रुतंजय ने कड़ी मेहनत की और दिन रात एक की। आईएएस ऑफिसर बनने के लिए श्रुतंजय ने 10-12 घंटे पढ़ाई की और दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा का एग्जाम पास किया। उनका नाम यूपीएससी की टॉप 100 रैंक होल्डर्स की लिस्ट में शामिल हुआ और इस समय वह तमिलनाडु के तिरुपुर में सब-कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
Kalki Koechlin: गोरे रंग की वजह से कल्कि को बॉलीवुड में नहीं मिलता काम, अभिनेत्री ने करियर पर किया खुलासा
श्रुतंजय नारायणन अपने परिवार के साथ
- फोटो : social media
ऐसा नहीं है कि उनमें अपने पिता और अभिनेता चिन्नी जयंत का गुण नहीं है। आज आईएएस अधिकारी बन देश की सेवा कर रहे श्रुतंजय नारायणन अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में नाटकों में भाग लिया करते थे। उन्होंने इन नाटकों में अभिनय का जौहर बखूबी दिखाया, लेकिन वह इसे करियर के तौर पर अपनाना नहीं चाहते थे। श्रुतंजय नारायणन ने आईएएस बनने से पहले भी कभी फिल्मी दुनिया में कदम नहीं रखा। वह पहले एक स्टार्टअप कंपनी में नौकरी किया करते थे। लेकिन इस जॉब के दौरान भी श्रुतंजय चार-पांच घंटे सेल्फ स्टडी किया करते थे। उस दौरान वह अपनी नाइट शिफ्ट में काम किया करते थे और पढ़ाई भी करते थे।
De De Pyaar De 2: पर्दे पर फिर जमेगा अजय-रकुल के प्यार का रंग, 'दे दे प्यार दे 2' के लिए लव रंजन से मिलाया हाथ